National Restaurant Association of India (NRAI) ने फूड सेफ्टी के नाम पर कंपनियों को सार्वजनिक रूप से बदनाम करने के चलन का विरोध किया है। रेगुलेटर्स की बढ़ती सख्ती के बीच **150** से ज्यादा नोटिस जारी होने से निवेशक अब रिस्क का आकलन कर रहे हैं।
देश भर में फूड सेफ्टी रेगुलेटर्स की सख्ती बढ़ती जा रही है, जिस पर अब National Restaurant Association of India (NRAI) ने मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि हाइजीन मानकों के उल्लंघन के मामले में कंपनियों को सीधे 'नेम एंड शेम' करना ब्रांड वैल्यू के लिए बड़ा खतरा है।
रेगुलेटर्स की बढ़ती सख्ती
Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) और राज्य स्तर के रेगुलेटर्स ने हाल ही में इंस्पेक्शन का दायरा काफी बढ़ा दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 150 से ज्यादा नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इस दायरे में Domino's Pizza जैसी बड़ी क्विक-सर्विस चेन से लेकर Andaz Delhi और JW Marriott जैसे लग्जरी होटल भी शामिल हैं। इन पर एक्सपायर्ड प्रोडक्ट के इस्तेमाल और किचन हाइजीन में कोताही जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
रेस्टोरेंट और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के निवेशकों के लिए यह एक बड़ा अलार्म है। संगठित चेन कंपनियों के लिए 'कंज्यूमर ट्रस्ट' ही उनकी असली कमाई है। अगर किसी बड़े ब्रांड का नाम हाइजीन से जुड़े विवादों में आता है, तो ग्राहकों की संख्या यानी फुटफॉल में गिरावट का सीधा असर कंपनी के तिमाही रेवेन्यू पर पड़ता है। इसके अलावा, रेगुलेटरी अनुपालन (compliance) सुनिश्चित करने के लिए स्टाफ ट्रेनिंग और सप्लाई चेन मॉनिटरिंग पर खर्च बढ़ने से कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
आगे क्या होगा?
मामला केवल हाइजीन तक सीमित नहीं है; Supreme Court ने भी अनहेल्दी फूड की लेबलिंग को लेकर FSSAI से कड़े सवाल किए हैं। निवेशकों को अब यह देखना होगा कि कंपनियां इन नोटिसों का जवाब कितनी तेजी से देती हैं। क्वालिटी कंट्रोल पर होने वाला खर्च भविष्य में कंपनियों की परफॉरमेंस तय करने वाला सबसे बड़ा फैक्टर साबित हो सकता है।
