NHC Foods लिमिटेड ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही और नौ महीनों के लिए अपने अन-ऑडिटेड फाइनेंशियल नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने टॉप-लाइन (रेवेन्यू) में तो दमदार ग्रोथ दिखाई है, लेकिन बॉटम-लाइन (मुनाफे) पर कुछ दबाव नज़र आया है।
Q3 FY26 के नतीजे
स्टैंडअलोन आधार पर, कंपनी के रेवेन्यू ऑफ़ ऑपरेशन्स में 59.45% की ज़बरदस्त बढ़त हुई, जो ₹11,698.09 लाख तक पहुँच गया। हालाँकि, प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 10.43% की गिरावट आई और यह ₹187.51 लाख रहा। बेसिक ईपीएस (EPS) भी ₹0.18 से गिरकर ₹0.03 पर आ गया।
कंसोलिडेटेड आधार पर, रेवेन्यू ऑफ़ ऑपरेशन्स में 76.11% की और भी तगड़ी उछाल आई और यह ₹12,919.04 लाख दर्ज किया गया। कंसोलिडेटेड PAT में 27.04% की बढ़त देखने को मिली, जो ₹264.65 लाख रहा। इसके बावजूद, बेसिक ईपीएस (EPS) ₹0.18 से घटकर ₹0.04 हो गया, जो प्रति शेयर प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव का संकेत दे रहा है।
नौ महीनों (Nine Months) के नतीजे
नौ महीनों की अवधि के लिए, स्टैंडअलोन रेवेन्यू 59.85% बढ़कर ₹33,069.71 लाख रहा। लेकिन, PAT में 15.64% की बड़ी गिरावट आई और यह ₹489.02 लाख पर सिमट गया। बेसिक ईपीएस (EPS) ₹0.46 से गिरकर ₹0.08 पर आ गया।
कंसोलिडेटेड रेवेन्यू नौ महीनों में 60.84% की बढ़त के साथ ₹34,290.66 लाख रहा। कंसोलिडेटेड PAT में 7.84% की गिरावट आई और यह ₹566.16 लाख पर रहा। बेसिक ईपीएस (EPS) ₹0.48 से घटकर ₹0.09 रह गया।
कॉर्पोरेट एक्शन और फ्यूचर प्लान
कंपनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स ने फ्यूचर ग्रोथ की अपनी मंशा जाहिर करते हुए 27 मिलियन USD (लगभग ₹225 करोड़, एक्सचेंज रेट के अधीन) तक फंड रेज़ करने की मंजूरी दे दी है। यह फंड इक्विटी शेयर्स, कन्वर्टिबल बॉन्ड, डिबेंचर्स, वारंट्स या प्रेफरेंस शेयर्स जैसे विभिन्न इंस्ट्रूमेंट्स के ज़रिए प्रेफरेंशियल इश्यू, QIP या अन्य तरीकों से जुटाया जा सकता है। इसके अलावा, कंपनी ने सेक्शन 180(1)(a) के तहत अपने बोरिंग लिमिट को ₹500 करोड़ तक बढ़ाने को भी हरी झंडी दे दी है।
पिछली फंड यूटिलाइजेशन
कंपनी ने यह भी कन्फर्म किया कि पिछले राइट्स इश्यू (₹47.42 करोड़) और प्रेफरेंशियल इश्यू ऑफ़ वारंट्स (₹8.125 करोड़) से जुटाई गई राशि के इस्तेमाल में कोई डेविएशन (विचलन) नहीं हुआ है। राइट्स इश्यू से मिले फंड्स का पूरा इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल, लोन रिपेमेंट और जनरल कॉर्पोरेट पर्पसेज़ के लिए किया गया था। वहीं, वारंट्स से मिली राशि का इस्तेमाल कैपिटल एक्सपेंडिचर, वर्किंग कैपिटल और जनरल कॉर्पोरेट एक्सपेंडिचर में हुआ।
रिस्क और आउटलुक
सबसे बड़ी चिंता रेवेन्यू ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी के बीच बड़ा अंतर है, खासकर स्टैंडअलोन PAT और EPS में गिरावट। कंपनी भले ही आक्रामक ग्रोथ दिखा रही है और इसके लिए फंड रेज़िंग और बोरिंग लिमिट बढ़ा रही है, लेकिन इन्वेस्टर्स की नज़र इस बात पर रहेगी कि ये फंड्स कैसे इस्तेमाल होते हैं और क्या वे प्रति शेयर प्रॉफिटेबिलिटी को बढ़ा पाते हैं। एग्जीक्यूशन रिस्क और मार्जिन पर पड़ने वाले मार्केट कंडीशंस के असर पर आने वाली तिमाहियों में बारीकी से नज़र रखनी होगी। कंपनी को गिरते EPS पर भी ध्यान देना होगा, जो वैल्यूएशन मल्टीपल्स को प्रभावित कर सकता है।