रिकॉर्ड रेवेन्यू पर Mother Dairy
Mother Dairy ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना कुल रेवेन्यू 17% बढ़ाकर ₹20,300 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। यह पिछले पांच सालों में कंपनी के रेवेन्यू का दोगुना है। कंपनी ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए 20% रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य रखा है। इस रेवेन्यू में सबसे बड़ा योगदान डेयरी सेगमेंट का रहा, जिसने ₹15,000 करोड़ से अधिक का टर्नओवर दिया। वहीं, खाने के तेल (Edible Oils) और बागवानी (Horticulture) उत्पादों ने करीब ₹5,000 करोड़ का योगदान दिया। वैल्यू-एडेड डेयरी और एडिबल ऑयल जैसे उत्पादों पर फोकस का असर दिखा, जिन्होंने टर्नओवर ग्रोथ में क्रमशः 23% और 25% से ज्यादा का योगदान दिया। कंपनी के रेवेन्यू का लगभग 63% हिस्सा दिल्ली-NCR क्षेत्र से आता है, जो इसके मजबूत पकड़ को दर्शाता है। वहीं, देश के अन्य हिस्सों से बाकी रेवेन्यू जनरेट हुआ। डिजिटल चैनलों (Quick Commerce) से भी कंपनी को 5% का योगदान मिला है।
लागत बढ़ी, पर दाम नहीं
अपने शानदार रेवेन्यू के बावजूद, Mother Dairy को बढ़ती इनपुट लागतों का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी ने माना है कि पैकेजिंग मटेरियल की कीमतों में 20% का इजाफा हुआ है, और दूध खरीद की लागत भी बढ़ी है। ऐसे में, कंपनी ने फिलहाल दाम न बढ़ाने का फैसला किया है। मैनेजमेंट का यह कदम बाजार हिस्सेदारी (Market Share) बनाए रखने और ग्राहकों को राहत देने की रणनीति का हिस्सा है, खासकर डेयरी उत्पादों के मामले में। हालांकि, इस फैसले का सीधा असर कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है। भारतीय डेयरी सेक्टर में वैसे भी दूध खरीद की ऊंची कीमतों और पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स जैसी लागतों के कारण मार्जिन पर दबाव देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 26 की मार्च तिमाही में दूध खरीद की लागत ₹3–4 प्रति लीटर बढ़ गई थी, जिससे कई कंपनियों को लागत बढ़ाए बिना काम चलाना मुश्किल हो रहा है।
विस्तार और भविष्य की योजनाएं
Mother Dairy अपनी क्षमता का विस्तार करने के लिए बड़ा निवेश कर रही है। कंपनी ₹2,000 करोड़ का कैपेक्स (Capex) करने की योजना बना रही है, जिसके तहत महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में नए डेयरी और बागवानी प्लांट लगाए जाएंगे। इन नई सुविधाओं के अगले साल के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। कंपनी अपने मौजूदा प्रोडक्ट रेंज को भी बढ़ा रही है, जिसमें हाई-प्रोटीन डेयरी उत्पादों की नई 'Pro' रेंज का लॉन्च भी शामिल है। भारतीय डेयरी सेक्टर में वैल्यू-एडेड और सेहतमंद (Health-Conscious) उत्पादों की मांग बढ़ रही है।
मार्जिन पर दबाव और क्षेत्रीय निर्भरता
Mother Dairy के रेवेन्यू में तो दमदार ग्रोथ दिख रही है, लेकिन पैकेजिंग जैसी लागतों में 20% की बढ़ोतरी को बिना दाम बढ़ाए झेलने की रणनीति से कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर जोखिम बना हुआ है। भारतीय डेयरी इंडस्ट्री इस समय मुश्किल दौर से गुजर रही है, जहां दूध खरीद की लागत बढ़ने से मुनाफे पर दबाव है। अनुमान है कि 2026 तक मार्जिन दबाव में रह सकते हैं, जब तक कि दूध की कीमतें ₹4–5 प्रति लीटर न बढ़ जाएं। Mother Dairy पब्लिकली लिस्टेड कंपनी नहीं है, इसलिए इसके वित्तीय स्वास्थ्य की सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है, जिससे मार्जिन की स्थिति का सटीक आकलन मुश्किल है। हालांकि, इंडस्ट्री के रुझान बताते हैं कि लागतों को बिना मुनाफे पर असर डाले झेलना चुनौतीपूर्ण होगा। दिल्ली-NCR पर 63% की निर्भरता कंपनी को स्थानीय आर्थिक बदलावों या बढ़ती प्रतिस्पर्धा के प्रति संवेदनशील बना सकती है। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर Amul की ब्रांड वैल्यू $4.1 बिलियन है, जबकि Mother Dairy की $1.15 बिलियन है, जो राष्ट्रीय पहुंच में एक बड़ा अंतर दिखाता है। Nandini जैसे खिलाड़ी भी दिल्ली-NCR जैसे प्रमुख बाजारों में दस्तक दे रहे हैं।
