गर्मी की दस्तक के साथ ही Mother Dairy ने अपने बिज़नेस के लिए बड़ा लक्ष्य तय किया है। कंपनी को उम्मीद है कि आइसक्रीम, दही और डेयरी बेवेरेजेज की कैटेगरी में इस साल 30% तक की बिक्री बढ़ेगी। इस उम्मीद के पीछे की वजह देश भर में तेजी से बढ़ता तापमान है, जो इन प्रोडक्ट्स की डिमांड को कई गुना बढ़ा देता है।
प्रोडक्शन बढ़ा रही है कंपनी
इस भारी डिमांड को पूरा करने के लिए Mother Dairy अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी को मजबूत कर रही है। साथ ही, कंपनी लगभग 30 नए प्रोडक्ट्स बाजार में उतारने की तैयारी में है। इनमें प्रीमियम कप आइसक्रीम, कम कैलोरी वाली आइसक्रीम के साथ-साथ छाछ और लस्सी जैसे पारंपरिक फ्लेवर भी शामिल होंगे। खास बात यह है कि कंपनी ने 'जामुन योगर्ट' और 'श्रीखंड' जैसे लोकल फ्लेवर को भी अपने नए पोर्टफोलियो में जगह दी है। इस सीजन में ब्रांड की पहचान को और मजबूत करने के लिए ICC मेन्स T20 वर्ल्ड कप के दौरान एक बड़ा मार्केटिंग कैंपेन भी चलाया जाएगा।
मार्केट में बड़ी ग्रोथ, पर कॉम्पिटिशन भी तगड़ा
भारतीय आइसक्रीम मार्केट अकेले ही 2033 तक 6.2 अरब डॉलर से 11 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, जिसमें 6.4% से 13.11% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) देखी जा सकती है। वहीं, पूरा डेयरी मार्केट 2024 में ₹18,975 अरब का था और 2033 तक यह ₹57,001.8 अरब तक पहुँचने की उम्मीद है, जिसकी CAGR 12.35% रहने का अनुमान है। यह ग्रोथ बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम, शहरीकरण और लोगों की बदलती पसंद का नतीजा है। अनुमान है कि इस गर्मी में आइसक्रीम और डेयरी प्रोडक्ट्स की बिक्री में 15-20% का उछाल आ सकता है।
हालांकि, Mother Dairy को इस मौके का फायदा उठाने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। Amul जैसी बड़ी कंपनियां हाई-प्रोटीन आइसक्रीम पर फोकस कर रही हैं, तो वहीं Havmor Ice Cream करीब 12 नए फ्लेवर लॉन्च कर रही है और पुणे में एक नया प्लांट भी लगाया है। Kwality Walls भी अपने आप को सिर्फ गर्मी के प्रोडक्ट से आगे बढ़ाकर सालभर चलने वाले स्नैक ब्रांड के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रही है।
हेल्थ और प्रीमियम का बढ़ता चलन
आजकल के कंज्यूमर, खासकर मिलेनियल्स और जेन Z, कम चीनी, कम कैलोरी, हाई-प्रोटीन और प्लांट-बेस्ड अल्टरनेटिव्स जैसे Health-focused Products की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। Mother Dairy का लो-कैलोरी आइसक्रीम लॉन्च करना इसी ट्रेंड का हिस्सा है। साथ ही, लोग अब क्वालिटी इंग्रेडिएंट्स और यूनिक फ्लेवर्स वाले प्रीमियम प्रोडक्ट्स के लिए ज्यादा कीमत चुकाने को भी तैयार हैं।
लागत का दबाव और मौसम का रिस्क
इन सबके बीच, इंडस्ट्री पर लागत का दबाव भी बढ़ रहा है। कोको और डेयरी प्रोडक्ट्स जैसी जरूरी चीजों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे मैन्युफैक्चरर्स के मार्जिन पर असर पड़ रहा है। गर्मी की मारक लहरें जहाँ बिक्री बढ़ाती हैं, वहीं दूसरी ओर कोल्ड चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन की एफिशिएंसी के लिए भी बड़ा रिस्क पैदा करती हैं। अनिश्चित मौसम, जैसे अचानक बारिश या अप्रत्याशित गर्मी, बिक्री के पैटर्न को डिस्टर्ब कर सकती है।
आगे की राह
Mother Dairy की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी बढ़ती इनपुट कॉस्ट को कैसे मैनेज करती है, अपनी एक्सपेंडेड कोल्ड चेन को प्रभावी ढंग से कैसे चलाती है, और भीड़ भरे मार्केट में कंज्यूमर की Health और Premium दोनों तरह की डिमांड को कैसे पूरा करती है।