दिग्गज शराब निर्माता कंपनी Mohan Meakin ने अपने मशहूर ब्रांड Old Monk के लेबल को बदलने का फैसला किया है। FSSAI द्वारा एजिंग क्लेम और आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग पर सवाल उठाने के बाद महाराष्ट्र में इसकी बिक्री फिलहाल रुकी हुई है, और कंपनी अब नए मानकों के अनुरूप पैकेजिंग तैयार कर रही है।
शराब बनाने वाली कंपनी Mohan Meakin अब अपने पॉपुलर ब्रांड Old Monk की लेबलिंग में बदलाव करने के लिए तैयार है। यह कदम Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) द्वारा मार्केटिंग तौर-तरीकों पर उठाए गए सवालों के बाद उठाया गया है। रेगुलेटर ने बोतल पर लिखे '7 years old blended' जैसे दावों को चुनौती दी थी, क्योंकि उत्पाद की बनावट पारंपरिक तरीके से की गई एजिंग प्रक्रिया से मेल नहीं खा रही थी।
महाराष्ट्र में बिक्री पर असर
इस रेगुलेटरी एक्शन के कारण महाराष्ट्र में ब्रांड की बिक्री पर अस्थायी रोक लग गई है। पहले कंपनी ने इस आदेश को चुनौती देने के लिए Bombay High Court का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अब मोहन मिकिन ने विवादित दावों को हटाने और आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग के इस्तेमाल के बारे में स्पष्ट खुलासा करने पर सहमति जताई है। राज्य में बिक्री तब तक बाधित रहेगी जब तक कंपनी नई पैकेजिंग के लिए कोर्ट से मंजूरी नहीं ले लेती।
क्या यह केवल एक कंपनी का मामला है?
निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि FSSAI पूरे Indian-Made Foreign Liquor (IMFL) सेक्टर की व्यापक समीक्षा कर रहा है ताकि लेबलिंग और मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। इसी तरह की जांच का सामना United Spirits और Inbrew Beverages जैसी अन्य बड़ी कंपनियों को भी करना पड़ा है। रेगुलेटर का मुख्य मुद्दा यह है कि कुछ कंपनियां न्यूट्रल स्पिरिट में आर्टिफिशियल एडिटिव्स मिलाकर वैसा स्वाद देने की कोशिश कर रही हैं, जो प्राकृतिक तरीके से मिलना चाहिए।
निवेशकों के लिए जोखिम और चुनौतियां
यह घटना लिकर कंपनियों के लिए ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ा सकती है। इन्वेंट्री को दोबारा लेबल करने, मार्केटिंग मटेरियल बदलने और कड़े नियमों के पालन के कारण कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, FSSAI ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई उत्पाद की सुरक्षा को लेकर नहीं, बल्कि लेबलिंग मानकों को लेकर है, फिर भी यह पूरे स्पिरिट सेक्टर के लिए कड़े रेगुलेटरी माहौल का संकेत है। अब बाजार की नजरें बिक्री फिर से शुरू होने की टाइमलाइन और FSSAI के आगामी दिशा-निर्देशों पर टिकी हैं।
