Modi Naturals ने वित्तीय वर्ष 2027 तक ₹950-1,100 करोड़ के राजस्व तक पहुंचने की योजना बनाई है, जिसका मुख्य कारण इथेनॉल उत्पादन क्षमता में बड़ा विस्तार है। कंपनी ने अपनी डिस्टिलरी (Distillery) संचालन को बढ़ावा देने के लिए ₹100 करोड़ का निवेश पूरा कर लिया है, साथ ही अपने Oleev एडिबल ऑयल ब्रांड का भी विस्तार कर रही है। निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या पूरी क्षमता का उपयोग और कच्चे माल की स्थिर कीमतें इस महत्वाकांक्षी विकास लक्ष्य का समर्थन करेंगी।
इथेनॉल और कंज्यूमर ब्रांड्स से कमाई का नया प्लान
Modi Naturals ने वितीय वर्ष 2027 के लिए ₹950 करोड़ से ₹1,100 करोड़ तक के महत्वाकांक्षी राजस्व लक्ष्य तय किए हैं। यह लक्ष्य मुख्य रूप से कंपनी के नए इथेनॉल बिजनेस और स्थापित कंज्यूमर फूड ब्रांड्स के प्रदर्शन पर आधारित है। FY26 में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹719.2 करोड़ था, इसलिए यह लक्ष्य एक बड़ी छलांग दर्शाता है।
₹100 करोड़ का निवेश और क्षमता विस्तार
इस ग्रोथ का सबसे बड़ा जरिया कंपनी का हालिया ₹100 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) प्रोग्राम है। इस निवेश से कंपनी की ग्रेन-बेस्ड इथेनॉल उत्पादन क्षमता में काफी इजाफा हुआ है। सब्सिडियरी Modi Biotech के जरिए, कंपनी ने रायपुर प्लांट में उत्पादन को 282 KLPD तक बढ़ा दिया है। मार्च 2026 से इस नए यूनिट से कमर्शियल ऑपरेशन शुरू होने के बाद, कंपनी अब मैक्सिमम कैपेसिटी यूटिलाइजेशन (Capacity Utilization) पर फोकस कर रही है। वर्तमान में, कंपनी के पास ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (Oil Marketing Companies) से इथेनॉल सप्लाई के लिए ₹400 करोड़ का ऑर्डर बुक है, जिससे भविष्य की कमाई का अंदाजा लग रहा है।
Oleev ब्रांड और नए प्रोडक्ट्स
इथेनॉल बिजनेस से कंपनी को स्केल (Scale) मिल रहा है, वहीं कंज्यूमर-facing डिवीजन अपनी मार्केट प्रेजेंस बनाए हुए है। प्रीमियम ओलिव ऑयल (Olive Oil) ब्रांड Oleev का अपने सेगमेंट में लगभग 16-18% मार्केट शेयर है। कंपनी की स्ट्रेटेजी इथेनॉल बिजनेस से जनरेट होने वाले कैश का इस्तेमाल Oleev और पास्ता (Pasta), पीनट बटर (Peanut Butter) जैसे अन्य पैक्ड फूड प्रोडक्ट्स को रिटेल मार्केट में और गहराई तक ले जाने के लिए करना है। फिलहाल, कंपनी 450 डिस्ट्रिब्यूटर्स (Distributors) और 50,000 से अधिक रिटेल आउटलेट्स (Retail Outlets) के जरिए अपने प्रोडक्ट्स बेच रही है।
निवेशकों के लिए अहम जोखिम
निवेशकों को इन बिजनेस मॉडल्स से जुड़े कुछ खास चैलेंजेज (Challenges) पर भी ध्यान देना चाहिए। इथेनॉल और एडिबल ऑयल (Edible Oil) दोनों ही सेक्टर्स कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति काफी संवेदनशील हैं। इथेनॉल बिजनेस अनाज की उपलब्धता और कीमतों पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है, जो फसल चक्र और मौसम की स्थिति से प्रभावित होते हैं। इसी तरह, भारत में एडिबल ऑयल मार्केट में कड़ी प्रतिस्पर्धा और कम मार्जिन (Margins) देखने को मिलता है। इसके अलावा, इथेनॉल सेगमेंट काफी हद तक सरकारी नीतियों और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के साथ ऑफटेक एग्रीमेंट्स (Offtake Agreements) पर निर्भर है। किसी भी रेगुलेटरी (Regulatory) बदलाव से भविष्य के परफॉर्मेंस पर असर पड़ सकता है।
FY26 में कंपनी ने ₹50.3 करोड़ का नेट प्रॉफिट (Net Profit) दर्ज किया था, लेकिन इसमें ₹4.9 करोड़ का एक इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट (Insurance Claim Settlement) भी शामिल था, जो कि नॉन-रिकरिंग (Non-recurring) है।
आगे क्या देखें?
भविष्य में, निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि कंपनी अपनी बढ़ी हुई डिस्टिलरी को फुल कैपेसिटी पर कितनी प्रभावी ढंग से चला पाती है और साथ ही अनाज और ऑयलसीड्स (Oilseeds) की इनपुट कॉस्ट (Input Cost) को कैसे मैनेज करती है। कच्चे माल की वोलेटाइल कीमतों के बीच प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने की क्षमता ही यह तय करेगी कि कंपनी अपने रेवेन्यू टारगेट्स को पूरा कर पाती है या नहीं।
