Modi Illva का बड़ा कदम: व्हिस्की से हटकर अब प्रीमियम वोडका में उतरे, ₹200 करोड़ का निवेश

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AuthorNeha Patil|Published at:
Modi Illva का बड़ा कदम: व्हिस्की से हटकर अब प्रीमियम वोडका में उतरे, ₹200 करोड़ का निवेश

Modi Illva अब अपने पोर्टफोलियो में विविधता ला रही है। कंपनी ने प्रीमियम भारतीय स्पिरिट्स और फ्लेवर्ड वोडका लॉन्च करने का ऐलान किया है, ताकि महंगी विदेशी शराब की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। कंपनी अगले पांच सालों में विस्तार और प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर ₹200 करोड़ खर्च करेगी।

Modi Illva का नया दांव: वोडका में उतरने की तैयारी

भारतीय स्पिरिट्स मार्केट में अपनी पहचान बना चुकी Modi Illva अब अपनी बिजनेस स्ट्रेटेजी में बड़ा बदलाव कर रही है। कंपनी अपने मुख्य व्हिस्की ब्रांड, Rockford, जो कि सालाना 32 लाख केस की बिक्री का एक बड़ा हिस्सा है, से आगे बढ़कर अब Artic ब्रांड के तहत फ्लेवर्ड वोडका की एक नई रेंज पेश कर रही है। इस नई पेशकश में जामुन, ग्रीन एप्पल और बेरी जैसे फ्लेवर शामिल होंगे। इसका मकसद उन ग्राहकों को लुभाना है जो अपने पेय पदार्थों में नए और हल्के टेस्ट की तलाश में हैं।

प्रीमियम की ओर बढ़ता कदम

व्हाइट स्पिरिट्स और सुपर-प्रीमियम भारतीय शराब की ओर यह बदलाव इंडस्ट्री के एक बड़े ट्रेंड को दर्शाता है। ग्राहक अब इंटरनेशनल ब्रांड्स की क्वालिटी वाले घरेलू उत्पादों के लिए ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार हैं। इन प्रीमियम प्रोडक्ट्स को डेवलप करके, Modi Illva ग्राहकों को इंपोर्टेड स्कॉच की महंगी कीमतों से बचते हुए हाई-क्वालिटी के विकल्प देना चाहती है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए, कंपनी ने अगले पांच सालों में ₹200 करोड़ का निवेश करने का फैसला किया है। यह पैसा रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), मार्केटिंग और एक नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में लगाया जाएगा, जो अगले महीने से प्रोडक्शन शुरू कर देगी।

बाजार की चाल और कॉम्पिटिशन

यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब भारतीय अल्कोहल सेक्टर संभावित ट्रेड पॉलिसी बदलावों के लिए तैयार है। खासकर, प्रस्तावित इंडिया-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत स्कॉच व्हिस्की पर इंपोर्ट ड्यूटी कम होने की संभावना है। ऐसी स्थिति में इंटरनेशनल ब्रांड्स से कॉम्पिटिशन बढ़ सकता है। हालांकि, कंपनी का मैनेजमेंट मानता है कि डोमेस्टिक प्रीमियम पर फोकस भारतीय ब्रांड्स को ग्लोबली ज्यादा कॉम्पिटिटिव बनने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, कंपनी भारतीय जलवायु के असर और मैचुरेशन प्रोसेस जैसी खास ऑपरेशनल बातों का भी ध्यान रख रही है, जिसके लिए पारंपरिक स्कॉच व्हिस्की निर्माताओं की तुलना में अलग प्रोडक्शन अप्रोच की जरूरत होगी।

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