Mattel India: डिजिटल कंटेंट से खिलौनों की डिमांड में उछाल, कंपनी को ₹5 अरब डॉलर के बाजार से उम्मीद

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AuthorAditya Rao|Published at:
Mattel India: डिजिटल कंटेंट से खिलौनों की डिमांड में उछाल, कंपनी को ₹5 अरब डॉलर के बाजार से उम्मीद

Mattel का कहना है कि भारत में डिजिटल कंटेंट की वजह से फिजिकल खिलौनों की मांग बढ़ रही है। बच्चे ऑनलाइन देखे अनुभवों को असल में दोहराना चाहते हैं। भारत का खिलौना बाजार साल 2034 तक **₹5 अरब डॉलर** का होने का अनुमान है, ऐसे में कंपनी इस क्षेत्र को सेल्स ग्रोथ और ग्लोबल सप्लाई चेन ऑपरेशंस दोनों के लिए अहम मान रही है।

भारत में खिलौनों की डिमांड में नया मोड़

Mattel कंपनी भारत में कंज्यूमर बिहेवियर में एक बड़ा बदलाव देख रही है। अब डिजिटल कंटेंट, फिजिकल खिलौनों की मांग को खत्म करने के बजाय उसे बढ़ा रहा है। कंपनी के टॉप मैनेजमेंट का कहना है कि बच्चे ऑनलाइन स्टोरीटेलिंग और डिजिटल मीडिया का इस्तेमाल करके फिजिकल प्ले को प्रेरित कर रहे हैं। इसी वजह से डॉल्स, एक्सेसरीज और कलेक्टिबल्स जैसे खिलौनों के सेट्स की डिमांड बढ़ी है। इस ट्रेंड ने कंपनी को अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव करने के लिए प्रोत्साहित किया है, जिससे वे एक पारंपरिक खिलौना निर्माता से हटकर इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) और एंटरटेनमेंट-फोकस्ड ब्रांड बनने की ओर बढ़ रहे हैं।

बढ़ता बाजार और लोकल इंफ्रास्ट्रक्चर

भारत का टॉय सेक्टर बढ़ते डिस्पोजेबल इनकम और बड़ी युवा आबादी के कारण तेजी से बदल रहा है। इंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, भारत का खिलौना बाजार साल 2034 तक $5 बिलियन (लगभग ₹41,000 करोड़) तक पहुंचने की उम्मीद है। डोमेस्टिक मार्केट में एक बड़ा बदलाव इंपोर्ट में कमी के रूप में देखा जा रहा है, जो 2019 से 71% तक गिर गया है। वहीं, 2026 फाइनेंशियल ईयर में एक्सपोर्ट $186 मिलियन तक पहुंच गया। ये आंकड़े बताते हैं कि लोकल मैन्युफैक्चरिंग ग्लोबल सप्लाई चेन में तेजी से इंटीग्रेट हो रही है और ज्यादा कॉम्पिटिटिव बन रही है।

बदलते कंज्यूमर प्रोफाइल और ब्रांड स्ट्रेटेजी

बच्चों के अलावा, Mattel वयस्कों के बीच कलेक्टर्स की बढ़ती संख्या भी देख रहा है। यह सेगमेंट अब ग्लोबल टॉय मार्केट का लगभग 27% हिस्सा है और 12-13% की सालाना दर से बढ़ रहा है। यह प्रीमियम और कलेक्टिबल आइटम्स के लिए एक स्टेबल रेवेन्यू स्ट्रीम प्रदान करता है। इस सेगमेंट का फायदा उठाने के लिए कंपनी हाई-प्रोफाइल कोलैबोरेशन कर रही है, जैसे कि हाल ही में लॉन्च हुई लिमिटेड-एडिशन दिवाली बार्बी, जिसने रिलीज के दो दिनों के भीतर ही सोल्ड आउट होकर तगड़ा कंज्यूमर इंटरेस्ट दिखाया। Hot Wheels जैसी दूसरी फ्रेंचाइजी पर भी अपनी हालिया फिल्म और एंटरटेनमेंट प्रोजेक्ट्स से सीखे गए फॉर्मूले को लागू करके, Mattel विभिन्न आयु समूहों के बीच लगातार ब्रांड एंगेजमेंट बनाए रखना चाहता है।

स्ट्रेटेजिक फोकस और अगले कदम

निवेशकों और मार्केट पर नजर रखने वालों के लिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Mattel एक प्योर-प्ले टॉय मेकर से एंटरटेनमेंट कंपनी बनने की अपनी यात्रा को भारतीय रिटेल इंफ्रास्ट्रक्चर की कॉम्पिटिटिव डायनामिक्स के साथ कितनी प्रभावी ढंग से बैलेंस करता है। हालांकि डिजिटल इंटीग्रेशन सेल्स के लिए एक सपोर्टिंग फैक्टर है, लेकिन इस स्ट्रेटेजी की लॉन्ग-टर्म सफलता कंपनी की लगातार कंटेंट डिलीवरी के माध्यम से हाई एंगेजमेंट लेवल बनाए रखने और लोकल मैन्युफैक्चरिंग परिदृश्य को सफलतापूर्वक नेविगेट करने की क्षमता पर निर्भर करेगी। निवेशक इस ग्रोथ को बनाए रखने के लिए कंपनी के भारत में सप्लाई चेन निवेश और अपने लाइसेंसड प्रोडक्ट सेगमेंट के प्रदर्शन पर भविष्य के अपडेट्स को ट्रैक कर सकते हैं।

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