Marriott International ने भारत में अपने होटल के विस्तार को लेकर एक बड़ी योजना का खुलासा किया है। कंपनी अगले 3-4 सालों में भारत को अपना दूसरा सबसे बड़ा ग्लोबल मार्केट बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए, वे भारत में अपने होटलों की संख्या को लगभग दोगुना करने की योजना बना रहे हैं, यानी पाइपलाइन में 200 से ज़्यादा नए होटल जोड़ने वाले हैं।
भारत को बनाया ग्रोथ का इंजन
अमेरिकी होटल कंपनी Marriott International की नजरें अब भारत पर हैं। कंपनी ने महत्वाकांक्षी योजना बनाई है कि अगले 3 से 4 सालों में भारत उनके लिए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार बन जाए। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए, Marriott की मौजूदा 230 होटलों और 35,000 से ज़्यादा कमरों की संख्या को लगभग दोगुना किया जाएगा। कंपनी का मानना है कि भारत में बिजनेस और टूरिज्म की बढ़ती मांग उनके इस विस्तार को गति देगी।
सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं
Marriott सिर्फ बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं रहेगा। कंपनी की योजना छोटे और मझोले शहरों में भी विस्तार करने की है, जहां उन्होंने 200 से ज़्यादा होटलों का एक मजबूत पाइपलाइन तैयार किया है। इसके साथ ही, कंपनी 'City Express' जैसे अपने मिड-स्केल ब्रांड्स को भी बढ़ावा दे रही है ताकि ज़्यादा से ज़्यादा ग्राहकों को आकर्षित किया जा सके। भारत में अपनी प्रतिबद्धता को और मज़बूत करते हुए, Marriott ने हैदराबाद में एक टेक्नोलॉजी एक्सेलेरेटर भी खोला है, जो ग्लोबल डिजिटल पहलों में मदद करेगा।
कमाई और कर्ज का हिसाब
Marriott के भारतीय कारोबार ने अच्छी तरक्की दिखाई है। 2025 में कंपनी का रेवेन्यू $1.5 अरब के पार पहुंच गया, जो दो साल पहले $1 अरब था। वहीं, 2026 की दूसरी तिमाही में ग्लोबल स्तर पर रेवेन्यू प्रति उपलब्ध कमरा (RevPAR) में 3.4% की बढ़ोतरी देखी गई। हालांकि, कंपनी पर $1.24 अरब का कर्ज भी है, जो उन्होंने अगस्त 2026 में नए फिक्स्ड-इनकम डेट ऑफरिंग के ज़रिए उठाया था। निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि कंपनी इस बढ़ते कर्ज को कैसे मैनेज करती है।
ग्लोबल जोखिम और चुनौतियां
भारत को लेकर भले ही Marriott उत्साहित हो, लेकिन दुनिया के दूसरे हिस्सों में कुछ चुनौतियां भी हैं। मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में RevPAR में 0.5% की मामूली गिरावट देखी गई है। भले ही खाड़ी क्षेत्र कंपनी के ग्लोबल ऑपरेशंस का छोटा हिस्सा है, लेकिन ऐसे भू-राजनीतिक अस्थिरता से कुछ क्षेत्रों में रेवेन्यू पर दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा, Marriott एक एसेट-लाइट, फी-ड्रिवन मॉडल पर काम करती है, जिसका मतलब है कि कंपनी होटल मालिकों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने और लेबर व रेनोवेशन की लागत को नियंत्रित करने पर निर्भर करती है। इन खर्चों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी से प्रॉफिट मार्जिन प्रभावित हो सकता है।
भारतीय बाज़ार में सीधी लिस्टिंग नहीं
भारतीय निवेशकों के लिए यह जानना ज़रूरी है कि Marriott International एक अमेरिकी कंपनी है और Nasdaq पर लिस्टेड है। भारतीय स्टॉक एक्सचेंज (NSE या BSE) पर इसकी सीधी इक्विटी लिस्टिंग नहीं है। इसलिए, भारत में इसके विस्तार से सीधे तौर पर भारतीय शेयर बाज़ार के ज़रिए निवेश का रास्ता नहीं खुलता। हालांकि, भारत में कंपनी का आक्रामक विस्तार और नए ब्रांड्स का परीक्षण देश के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की ग्रोथ का संकेत देता है। निवेशकों को अब 200 होटलों के पाइपलाइन की प्रगति और विस्तार के लिए कर्ज पर निर्भरता बढ़ाते हुए प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखने की कंपनी की क्षमता पर नज़र रखनी चाहिए।
