Marico के बढ़ते रेवेन्यू पर लागतों का साया
Marico ने 4Q FY26 में ₹3,333 करोड़ का मजबूत रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि से 22% ज्यादा है। कंपनी ने घरेलू बाजार में 9% की सॉलिड वॉल्यूम ग्रोथ हासिल की, जो पिछले 7 सालों में सबसे बेहतरीन है। वहीं, इंटरनेशनल रेवेन्यू में भी कॉन्स्टेंट करेंसी बेसिस पर 19% की शानदार बढ़ोतरी देखी गई।
प्रीमियम वैल्यूएशन पर सवाल?
लेकिन, Marico का शेयर अपने साथियों और ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा है। कंपनी का ट्रेलिंग ट्वेल्व-मंथ (TTM) P/E रेश्यो करीब 61.27 है। इसकी तुलना में Dabur India का P/E रेश्यो ~44.1 और Hindustan Unilever (HUL) का ~37.47 से 54.7 के आसपास है। इतना हाई मल्टीपल बताता है कि बाजार कंपनी से भविष्य में जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद कर रहा है। हालांकि, ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने 'Buy' रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹950 का टारगेट दिया है, और अन्य एनालिस्ट्स ने भी ₹900 से ₹960 तक का टारगेट सेट किया है।
भू-राजनीतिक तनाव से मार्जिन पर दबाव
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर Marico की इनपुट कॉस्ट पर साफ दिख रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण पैकेजिंग मटेरियल और फ्रेट (माल ढुलाई) जैसी लागतें बढ़ गई हैं। इसके चलते, Marico का EBITDA मार्जिन Q4 FY26 में घटकर 15.6% रह गया, जो पिछले साल 16.8% था। यह एनालिस्ट्स की उम्मीदों से कम है। तुलनात्मक रूप से, HUL का EBITDA मार्जिन इसी तिमाही में 23.6% रहा। कंपनी का मैनेजमेंट लागत कम करने और कीमतों में बढ़ोतरी जैसे कदम उठाने पर विचार कर रहा है।
मुख्य जोखिम: हाई वैल्यूएशन और बाहरी झटके
Marico का 60x से ऊपर का P/E रेश्यो एक बड़ा जोखिम है। इसका मतलब है कि शेयर की मौजूदा कीमत में कंपनी के बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीदें पहले से शामिल हैं। अगर भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है या इनपुट कॉस्ट इन्फ्लेशन लंबा खिंचता है, तो कंपनी के नतीजों में उम्मीद से कम ग्रोथ दिख सकती है, जिससे शेयर में बड़ी गिरावट आ सकती है। मिडिल ईस्ट क्षेत्र से आने वाले रेवेन्यू में भी भू-राजनीतिक वजहों से 7% की कमी आई है।
आगे की राह: डाइवर्सिफिकेशन और मार्जिन
आगे चलकर, Marico अपने रेवेन्यू को प्रीमियम और डिजिटल-फर्स्ट कैटेगरी में डाइवर्सिफाई करने पर फोकस कर रही है। कंपनी का लक्ष्य FY27 तक ₹15,000 करोड़ से अधिक का रेवेन्यू हासिल करना है। कंपनी को उम्मीद है कि कमोडिटी की कीमतें कम होने और लागत-बचत पहलों से मार्जिन में सुधार होगा।
