Marico का शेयर ₹842.9 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, लेकिन कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर लगातार दबाव बना हुआ है। हालांकि, कंपनी ने रेवेन्यू और वॉल्यूम ग्रोथ में शानदार प्रदर्शन किया है, जो शेयर की इस तेजी का मुख्य कारण है।
FY26 के लिए कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 26% बढ़कर ₹13,611 करोड़ हो गया, जबकि मार्च 2026 को समाप्त चौथी तिमाही (Q4 FY26) में यह 22% की बढ़त के साथ ₹3,333 करोड़ रहा। डोमेस्टिक बिजनेस में 9% की वॉल्यूम ग्रोथ और इंटरनेशनल सेल्स में 19% (स्थिर करेंसी में) की बढ़त ने इस ग्रोथ को पंख लगाए। पूरे साल डोमेस्टिक वॉल्यूम ग्रोथ 8% रही, जो सात सालों में सबसे ज्यादा है।
लेकिन, कंपनी के लिए यह बात चिंताजनक है कि जहां एक ओर उसका रेवेन्यू और वॉल्यूम बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर उसका EBITDA मार्जिन घटकर 15.6% रह गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 16.8% था। यह एनालिस्टों की उम्मीदों से भी कम है। इस मार्जिन दबाव की मुख्य वजहों में बढ़ी हुई ऑपरेटिंग कॉस्ट (operating costs) और इनपुट प्राइस (input prices) में अस्थिरता शामिल है। भले ही कोपरा (copra) की कीमतों में नरमी आई है, लेकिन यह बढ़ी हुई लागतों की भरपाई नहीं कर पा रही। तुलनात्मक रूप से, Hindustan Unilever (HUL) ने Q4 FY26 में 23.6% का EBITDA मार्जिन दर्ज किया।
Marico की ग्रोथ के पीछे 'प्रोजेक्ट सेतु' (Project SETU) जैसी पहलें हैं, जिनका मकसद कंपनी की डायरेक्ट रीच (direct reach) बढ़ाना है। कंपनी अपने फूड्स (Foods) और डिजिटल-फर्स्ट पोर्टफोलियो (Digital-first portfolios) का विस्तार भी कर रही है। FY26 में फूड्स डिवीजन ने ₹1,000 करोड़ का सालाना रेवेन्यू पार किया, जो मार्च तिमाही में 16% बढ़ा।
कंपनी का वैल्यूएशन (valuation) भी चर्चा का विषय है। Marico का ट्रेलिंग 12-मंथ P/E (TTM P/E) करीब 52.5 से 59.5 है, जो इसके प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों Hindustan Unilever (HUL) के 37.47-54.7 और Dabur India के 43.42-44.89 के P/E से काफी अधिक है। कुछ एनालिस्ट इसे इसके वर्तमान P/E और भविष्य की आय के अनुमानों को देखते हुए ओवरवैल्यूड (overvalued) मान रहे हैं।
हालांकि, ज्यादातर एनालिस्ट अभी भी Marico पर 'Buy' रेटिंग दे रहे हैं और कुछ मामूली अपसाइड की उम्मीद कर रहे हैं। कंपनी का मैनेजमेंट FY27 में भारत में हाई-सिंगल-डिजिट वॉल्यूम ग्रोथ और इंटरनेशनल बिजनेस में मिड-टीन ग्रोथ का अनुमान लगा रहा है, जिसका लक्ष्य अगले फाइनेंशियल ईयर में ₹15,000 करोड़ से अधिक का रेवेन्यू हासिल करना है। इतनी ऊंची वैल्यूएशन पर मुनाफा (profit) न बढ़ा पाना निवेशकों के लिए चिंता का सबब है।
