Marico के शेयरों में बुधवार को **2.36%** की गिरावट आई और यह **₹854.35** पर बंद हुआ। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने कंपनी पर 'खरीदें' (Buy) की रेटिंग बनाए रखी है और टारगेट प्राइस **₹1,050** रखा है। कंपनी ने हाल ही में Q1 FY27 में मजबूत नतीजे पेश किए थे, जिसमें रेवेन्यू **23%** बढ़ा और डोमेस्टिक वॉल्यूम ग्रोथ **11%** रही।
नतीजों के बावजूद शेयरों में गिरावट
बुधवार को Marico के शेयर 2.36% गिरकर ₹854.35 पर बंद हुए। यह गिरावट ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal की तरफ से कंपनी पर 'खरीदें' (Buy) की रेटिंग और ₹1,050 के टारगेट प्राइस के बावजूद आई। ऐसा लगता है कि निवेशकों ने हाल की तेजी के बाद मुनाफावसूली (Profit Booking) की है।
Q1 FY27 में शानदार नतीजे
कंपनी ने हाल ही में 2027 के फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे पेश किए थे, जो काफी दमदार थे। जून 2026 को समाप्त तिमाही में Marico का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 23% बढ़कर ₹3,957 करोड़ रहा। नेट प्रॉफिट में भी 25% का इजाफा हुआ और यह ₹630 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी की डोमेस्टिक वॉल्यूम ग्रोथ 11% रही, जो पिछले 20 तिमाहियों में पहली बार इतनी मजबूत हुई है। ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 20.7% रहा, जो पिछले साल की तुलना में 40 बेसिस पॉइंट ज्यादा है।
बाजार की प्रतिक्रिया और वैल्यूएशन
इन शानदार नतीजों और ब्रोकरेज के ₹1,050 के टारगेट प्राइस (जो FY28 के अनुमानित नतीजों पर आधारित है) के बावजूद, 5 अगस्त को शेयर में गिरावट दर्ज की गई। शेयर की कीमतों में आई यह गिरावट बताती है कि कुछ निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली करने का फैसला किया। हालांकि, ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि कंपनी के मजबूत बिजनेस परफॉर्मेंस को देखते हुए मौजूदा वैल्यूएशन उचित है।
आगे के लिए मुख्य जोखिम (Key Risks)
कंपनी का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस मजबूत बना हुआ है, लेकिन कुछ ऐसे फैक्टर हैं जो भविष्य के नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। मैनेजमेंट ने कहा है कि वे महंगाई (Inflation) पर कड़ी नजर रख रहे हैं, खासकर खाने के तेल की कीमतों पर, जो सीधे उत्पादन लागत को प्रभावित करती हैं। इसके अलावा, कंपनी मॉनसून के पूर्वानुमान और अल नीनो (El Niño) के संभावित प्रभावों पर भी नजर रख रही है, क्योंकि ये ग्रामीण मांग (Rural Demand) के लिए महत्वपूर्ण हैं। भू-राजनीतिक कारक (Geopolitical Factors) भी इनपुट लागतों में अस्थिरता पैदा कर रहे हैं। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में यह देखना होगा कि कंपनी इन लागत दबावों को कैसे मैनेज करती है ताकि अपने प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रख सके।
