Mango India Sales: ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक्री में 50:50 की बराबरी, Myntra के साथ पार्टनरशिप से मिली रफ्तार

CONSUMER-PRODUCTS
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Mango India Sales: ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक्री में 50:50 की बराबरी, Myntra के साथ पार्टनरशिप से मिली रफ्तार

स्पेनिश रिटेलर Mango ने भारत में अपनी ऑनलाइन और फिजिकल स्टोर्स की बिक्री में 50:50 का शानदार संतुलन बना लिया है। कंपनी Myntra के साथ मिलकर अपने फिजिकल स्टोर्स को लोकल डिलीवरी हब की तरह इस्तेमाल कर रही है, जिससे डिलीवरी तेज हो रही है और ग्राहकों की लॉयल्टी बढ़ रही है।

ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक्री में 50:50 की बराबरी

स्पेनिश फैशन रिटेलर Mango ने भारत में अपनी बिक्री को ऑनलाइन और फिजिकल स्टोर्स के बीच बराबर बांटने में सफलता हासिल की है। यह एक बड़ा माइलस्टोन है, जो दिखाता है कि कैसे ब्रांड अपने ग्राहकों तक पहुंचने के लिए पारंपरिक मॉडल से आगे बढ़ रहा है, जहां ऑनलाइन और ऑफलाइन बिजनेस अलग-अलग काम करते थे।

क्विक कॉमर्स की भूमिका

इस ओमनीचैनल (Omnichannel) रणनीति की सफलता में Mango का Myntra के साथ पुराना रिश्ता बहुत काम आया है। Myntra की M-Now सर्विस का इस्तेमाल करके, Mango अपने फिजिकल स्टोर्स को छोटे डिलीवरी सेंटर्स में बदल पा रहा है। जब कोई ग्राहक ऑनलाइन ऑर्डर करता है, तो प्रोडक्ट अक्सर किसी दूर के वेयरहाउस के बजाय पास के स्टोर से ही भेजा जाता है। इस तरीके से डिलीवरी का समय काफी कम हो जाता है और ब्रांड सिर्फ बड़े शहरों में ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के ग्राहकों तक भी पहुंच पाता है।

डेटा बताता है कि यह तेज डिलीवरी मॉडल ग्राहकों की वफादारी बढ़ा रहा है। जो ग्राहक इस सर्विस का इस्तेमाल करते हैं, उनमें से बड़ी संख्या दोबारा खरीदारी करने वाले ग्राहक बन रहे हैं। रिटेल इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ा संकेत है: फिजिकल स्टोर्स सिर्फ घूमने-फिरने की जगह नहीं रह गए हैं, बल्कि वे ऑनलाइन बिक्री बढ़ाने के लिए जरूरी लॉजिस्टिक्स हब बन गए हैं।

ऑपरेशनल स्ट्रैटेजी में बदलाव

Mango ने अपने फिजिकल स्टोर्स के नेटवर्क को भी बेहतर बनाया है। कंपनी के भारत में फिलहाल लगभग 76 पॉइंट्स ऑफ सेल (Points of Sale) हैं, जो 2024 में लगभग 110 स्टोर्स से कम है। यह एक सोची-समझी रणनीति है जिसके तहत छोटे और कम असरदार 'शॉप-इन-शॉप' फॉर्मेट्स को बंद किया जा रहा है। इन स्टोर्स में अक्सर पूरी प्रोडक्ट रेंज और ब्रांड की पहचान अच्छे से नहीं दिख पाती थी। अब कंपनी बड़े, 'डेस्टिनेशन-स्टाइल' स्टोर्स पर ध्यान दे रही है, जो ग्राहकों को बेहतर अनुभव प्रदान करते हैं।

भले ही Mango ने इस मॉडल में सफलता पाई है, लेकिन कंपनी भारत में एक प्राइवेट एंटिटी (Private Entity) बनी हुई है। इसका मतलब है कि इसके फाइनेंशियल नतीजे सीधे तौर पर पब्लिक स्टॉक मार्केट निवेशकों के लिए उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, इसका बिजनेस मॉडल बाकी रिटेल सेक्टर के लिए एक केस स्टडी (Case Study) का काम करता है, जो रियल एस्टेट की ऊंची लागत और डिजिटल डिलीवरी की एफिशिएंसी (Efficiency) के बीच संतुलन बनाने पर जोर दे रहा है।

चुनौतियाँ और कॉम्पिटिशन

भारतीय रिटेल मार्केट में अपनी अलग चुनौतियाँ हैं। Mango ने कहा है कि क्वालिटी रिटेल रियल एस्टेट की कमी उसकी तेजी से विस्तार करने की राह में एक बाधा है। इसके अलावा, फैशन सेगमेंट में कड़ी कॉम्पिटिशन है, जहां इंटरनेशनल प्रीमियम ब्रांड्स और बड़े डोमेस्टिक रिटेल चेन्स दोनों ही ग्राहकों का ध्यान खींचने के लिए होड़ कर रहे हैं।

एक और बड़ा फैक्टर इस बिजनेस की एक ही पार्टनर पर निर्भरता है। क्योंकि Myntra ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों फ्रेंचाइजी ऑपरेशंस को मैनेज करती है, Mango भारत में अपनी ग्रोथ के लिए इस रिश्ते पर बहुत ज्यादा निर्भर है। इस पार्टनरशिप में कोई भी बाधा या प्लेटफॉर्म की स्ट्रेटेजी में बदलाव उसके मार्केट रीच (Market Reach) को प्रभावित कर सकता है। आगे चलकर, कंपनी अपनी 'Mango Man' डिवीजन को बढ़ाने और युवा, बजट-फ्रेंडली ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कैजुअल, किफायती प्रोडक्ट लाइन पेश करने की योजना बना रही है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.