गुरदासपुर कंज्यूमर कमीशन ने MakeMyTrip को एक परिवार को **₹48,775** का हर्जाना देने का आदेश दिया है। परिवार अपनी बुकिंग के बावजूद होटल न मिलने के कारण -4 डिग्री सेल्सियस की कड़ाके की ठंड में बाहर रहने को मजबूर हुआ था।
गुरदासपुर के कंज्यूमर फोरम ने एक सख्त फैसला सुनाते हुए ट्रैवल प्लेटफॉर्म MakeMyTrip को ₹48,775 का हर्जाना भरने का आदेश दिया है। मामला तब सामने आया जब एक परिवार श्रीनगर और गुलमर्ग छुट्टियां मनाने पहुंचा, लेकिन वहां पहुंचने पर पता चला कि जिस होटल की बुकिंग कन्फर्म थी, वह वहां मौजूद ही नहीं था। कड़ाके की -4 डिग्री सेल्सियस ठंड में परिवार को अपनी गाड़ी में रात बिताने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे उन्हें मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।
'इंटरमीडियरी' का तर्क खारिज
सुनवाई के दौरान, MakeMyTrip ने 'इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000' के तहत खुद को सिर्फ एक 'इंटरमीडियरी' (मध्यस्थ) बताया। कंपनी का कहना था कि वह केवल बुकिंग में मदद करती है, होटल के संचालन पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है। लेकिन कंज्यूमर कमीशन ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने साफ कहा कि जब कंपनी ग्राहक से सीधे भुगतान (पेमेंट) लेती है, तो वह केवल बुकिंग का जरिया नहीं रह जाती, बल्कि सेवा की गुणवत्ता के लिए भी जवाबदेह बन जाती है।
ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स के लिए बढ़ती चुनौतियां
निवेशकों और बाजार के जानकारों के लिए यह एक बड़े बदलाव का संकेत है। ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियां (OTAs) अक्सर हजारों वेंडर्स के नेटवर्क पर टिकी होती हैं। यदि इन प्लेटफॉर्म्स की वेरिफिकेशन प्रोसेस कमजोर रही, तो उन्हें भारी कानूनी और वित्तीय जोखिम उठाना पड़ सकता है। अब ऐसी कंपनियों को अपनी सर्विस क्वालिटी और वेंडर वेरिफिकेशन को और सख्त करना होगा, ताकि कानूनी पचड़ों और ब्रांड की साख को नुकसान न पहुंचे।
