नवी मुंबई में अधिकारियों ने एक ऐसे वेयरहाउस का भंडाफोड़ किया है जहाँ एक्सपायरी डेट और न्यूट्रिशनल लेबल के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था। इस घटना के बाद सप्लाई चेन की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या हुआ खुलासा?
महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) और नवी मुंबई पुलिस ने टर्भे इंडस्ट्रियल एरिया में एक वेयरहाउस पर छापेमारी की, जहाँ 'साधना एंटरप्राइजेज' (Sadhana Enterprises) नाम की फर्म एक संगठित रैकेट चला रही थी। अगस्त के आखिरी हफ्ते में हुई जांच में सामने आया कि यहां केमिकल सॉल्वैंट्स का इस्तेमाल करके पैकेट पर लिखी मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट को मिटाया जा रहा था। इसके बाद इंकजेट प्रिंटर और फर्जी स्टिकर्स के जरिए डेट्स बदलकर सामान को मार्केट में खपाया जा रहा था।
बरामदगी और माल की वैल्यू
अधिकारियों ने मौके से 4,900 से 8,500 कार्टन सामान जब्त किया है, जिसकी बाजार कीमत ₹75 लाख से अधिक बताई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि इसमें PepsiCo, Nestle, Coca-Cola और Hindustan Unilever जैसे बड़े ब्रांड्स के उत्पाद शामिल थे। फिलहाल, इन कंपनियों की इसमें सीधे तौर पर कोई भूमिका नहीं पाई गई है, बल्कि यह वेयरहाउस 10 से अधिक छोटी एक्सपोर्ट-इंपोर्ट फर्मों के लिए 'अनऑथोराइज्ड मिडलमैन' का काम कर रहा था। पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर ली है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर के निवेशकों के लिए यह एक 'चेतावनी' है। बड़े ब्रांड्स का नाम ऐसी गतिविधियों में जुड़ना उनकी इमेज को नुकसान पहुंचा सकता है। अब संभावना है कि रेगुलेटर्स सप्लाई चेन को ट्रैक करने के लिए और भी सख्त ऑडिट नियम ला सकते हैं। इससे कंपनियों पर 'Compliance Cost' बढ़ सकती है। आगे चलकर एक्सपोर्ट से जुड़ी छोटी कंपनियों पर भी रेगुलेटरी गाज गिर सकती है, जिसका असर उनके ऑपरेशंस और मार्जिन पर पड़ना तय है।
