महाराष्ट्र FDA ने इन्फेंट फॉर्मूला (Infant formula) के विज्ञापनों, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और डॉक्टर्स को स्पॉन्सरशिप देने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इस फैसले से Nestlé India जैसी FMCG कंपनियों की मार्केटिंग स्ट्रैटेजी पर बड़ा असर पड़ेगा और नियम तोड़ने पर **₹10 लाख** तक का जुर्माना हो सकता है।
नियम और पाबंदियां
महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे द्वारा जारी इस नए आदेश ने बेबी फूड इंडस्ट्री की धड़कनें बढ़ा दी हैं। अब राज्य में इन्फेंट फॉर्मूला के लिए किसी भी तरह का सोशल मीडिया कैंपेन, इन्फ्लुएंसर एंडोर्समेंट या फ्री सैंपल्स का वितरण प्रतिबंधित है। यही नहीं, अब कंपनियों को डॉक्टर्स या मेडिकल एसोसिएशन को रिसर्च ग्रांट, स्पॉन्सरशिप या हॉस्पिटैलिटी देने पर भी रोक लगा दी गई है।
पैकेजिंग में बड़े बदलाव
नियमों के तहत, अब सभी प्रोडक्ट की पैकेजिंग पर अनिवार्य रूप से "IMPORTANT NOTICE & MOTHER'S MILK IS BEST FOR YOUR BABY" लिखना होगा। साथ ही, पैकेजिंग पर शिशुओं या महिलाओं की फोटो इस्तेमाल करने पर पूरी तरह पाबंदी है। मार्केटिंग की भाषा में "humanised", "maternalised" या "complete food" जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी नहीं किया जा सकेगा।
कंपनियों पर वित्तीय दबाव
कंपनियों को अब हर बैच की पूरी ट्रैकिंग (Batch-wise traceability) रखनी होगी और किसी भी प्रतिकूल घटना (Adverse event) की रिपोर्ट 48 घंटे के भीतर करनी होगी। अगर कोई कंपनी नियमों का पालन नहीं करती है, तो उस पर ₹10 लाख तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। यह कदम FMCG सेक्टर के लिए एक चुनौती है, क्योंकि कंपनियों को अब अपनी मार्केटिंग बजट और स्ट्रेटजी को पूरी तरह से बदलना पड़ सकता है। निवेशकों की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या दूसरे राज्य भी महाराष्ट्र की तर्ज पर ऐसे कड़े कदम उठाएंगे या नहीं।
