फैक्ट्री पुश और सेल्स में तूफ़ानी तेज़ी
Magnum Ice Cream इंडिया में अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का ज़बरदस्त विस्तार कर रही है। अभी तक जहां कंपनी की एक ही फैक्ट्री थी, वहीं अब चार नई फैक्ट्रियां लगाई जाएंगी। यह कदम कंपनी की 50% से ज़्यादा की तूफानी सेल्स ग्रोथ को देखते हुए उठाया जा रहा है। कंपनी के CEO, Peter ter Kulve ने स्वीकार किया है कि फिलहाल प्रॉफिटेबिलिटी "बहुत अच्छी नहीं" है। इसकी मुख्य वजह है इंडिया जैसे उभरते बाजार में कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर और फ्रीजर कैबिनेट्स को बढ़ाने में भारी निवेश। लगभग 50,000 नए आइसक्रीम कैबिनेट्स लगाने पड़ रहे हैं, जिनके कारण खर्च बढ़ा है। Unilever से डीमर्जर के बाद Magnum को ऐसी ग्रोथ-फोकस्ड रणनीतियों को अपनाने की आज़ादी मिली है, जिसका मकसद तुरंत मुनाफे से ज़्यादा मार्केट शेयर हासिल करना है।
भारतीय आइसक्रीम मार्केट में ज़बरदस्त ग्रोथ की उम्मीद
भारतीय आइसक्रीम मार्केट में आने वाले सालों में ज़बरदस्त उछाल आने की उम्मीद है। साल 2025 में जहां यह मार्केट करीब $3.8 बिलियन का था, वहीं 2034 तक यह $14 बिलियन से भी ऊपर पहुँच सकता है। इस मार्केट की एनुअल ग्रोथ लगभग 16% रहने का अनुमान है। बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम, शहरों में बढ़ती आबादी और बेहतर होती कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स इस ग्रोथ को बढ़ावा दे रहे हैं। Amul, Vadilal और Mother Dairy जैसे बड़े खिलाड़ी पहले से ही मैदान में हैं। Magnum अपने पूर्व पैरेंट (HUL) की 9.8% मार्केट शेयर की विरासत को आगे बढ़ाना चाहती है और दुनिया के सबसे बड़े डेयरी प्रोड्यूसर, इंडिया, के आइसक्रीम सेक्टर में बड़ा हिस्सा कैप्चर करना चाहती है। Kwality Wall's (India) Limited में बड़ी हिस्सेदारी का अधिग्रहण भी इसी रणनीति का हिस्सा है।
प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव और रेगुलेटरी चुनौतियां
तेज़ सेल्स ग्रोथ के बावजूद, इंडिया में Magnum के ऑपरेशन्स के लिए प्रॉफिटेबिलिटी एक बड़ा कंसर्न बनी हुई है। कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर और फ्रीजर कैबिनेट्स में बड़े पैमाने पर निवेश, जो कि उसके पूर्व पैरेंट ने उतनी प्राथमिकता से नहीं किया था, प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल रहा है। यह भारी खर्च तुरंत रिटर्न की संभावनाओं को प्रभावित कर रहा है। Kwality Wall's इंडिया में मेजॉरिटी स्टेक खरीदने की डील को रेगुलेटरी जांच का भी सामना करना पड़ा है। यदि Magnum का स्टेक 75% से ऊपर जाता है, तो उसे भारत के मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नियमों का पालन करने के लिए 25% पब्लिक ओनरशिप सुनिश्चित करनी होगी, जिसके लिए स्टेक कम करना पड़ सकता है। Kwality Wall's के लिए ओपन ऑफर प्राइस ₹21.33 रखा गया है, जो NSE पर ₹25.22 के ट्रेडिंग प्राइस से कम है, ऐसे में शेयरहोल्डर इस ऑफर को स्वीकार करने में हिचकिचा सकते हैं।
मार्केट शेयर से प्रॉफिट की राह
Magnum को उम्मीद है कि जैसे-जैसे फैक्ट्रियां ज़्यादा एफिशिएंट होंगी और प्रीमियम ब्रांड्स की डिमांड बढ़ेगी, वैसे-वैसे प्रॉफिट में भी इज़ाफ़ा होगा। कंपनी का मानना है कि इंडिया की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ क्षमता मौजूदा खर्चों को जायज़ ठहराती है। Magnum की इंडिया में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह मुश्किल कॉम्पिटिशन और बदलते टेस्ट के बीच मार्केट शेयर को स्थायी प्रॉफिट में कैसे बदल पाती है।
