Luggage Industry: त्योहारी सीजन में सुस्त मांग से कंपनियां परेशान, डिस्काउंट छोड़ अब प्रीमियम पर दांव

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Luggage Industry: त्योहारी सीजन में सुस्त मांग से कंपनियां परेशान, डिस्काउंट छोड़ अब प्रीमियम पर दांव

भारत की दिग्गज लगेज कंपनियों ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। सुस्त मांग और कच्चे माल की बढ़ती लागत के बीच, कंपनियां अब भारी डिस्काउंट के बजाय प्रीमियम प्रोडक्ट्स और बंडलिंग पर जोर दे रही हैं ताकि मार्जिन को बचाया जा सके।

भारत की लगेज कंपनियां इस बार त्योहारी और वेडिंग सीजन में एक नई रणनीति के साथ मैदान में उतरी हैं। साल भर कच्चे माल की ऊंची कीमतों और ट्रैवल डिमांड में कमी के चलते कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बना हुआ है। क्रिसिल (Crisil) की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल वॉल्यूम ग्रोथ केवल 2-3% रहने का अनुमान है, जिसके चलते कंपनियां अब पुराने डिस्काउंट मॉडल को छोड़कर प्रीमियम प्रोडक्ट्स और कॉर्पोरेट गिफ्टिंग पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

कंपनियों का हाल

सेक्टर की प्रमुख कंपनियों के नतीजों में भी यह चुनौती साफ दिखी है। पहली तिमाही में Safari Industries का नेट प्रॉफिट 5.4% गिर गया, वहीं VIP Industries के रेवेन्यू में 11.7% की गिरावट दर्ज की गई। इसकी बड़ी वजह पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलीकार्बोनेट जैसे कच्चे माल की कीमतों में उछाल है, जो अभी भी पिछले साल के मुकाबले लगभग 20% ऊपर बने हुए हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर इन कंपनियों के शेयरों में साल की शुरुआत से ही डबल-डिजिट की गिरावट देखी जा रही है।

भविष्य की राह

यह क्वार्टर (अक्टूबर-दिसंबर) कंपनी के सालाना रेवेन्यू का करीब एक-तिहाई हिस्सा होता है, इसलिए कंपनियों को बड़ी उम्मीदें हैं। लंबी अवधि में, मार्केट का लक्ष्य 2028 तक ₹26,700 करोड़ के बाजार आकार तक पहुंचना है। हालांकि, निवेशकों के लिए अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या प्रीमियम प्रोडक्ट्स की बिक्री से कंपनियां सुस्त वॉल्यूम की भरपाई कर पाती हैं या नहीं। आने वाले नतीजों में मार्जिन की स्थिरता इस स्टॉक की दिशा तय करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.