दिग्गज चॉकलेट मेकर Lindt & Sprüngli में घमासान तेज हो गया है। CEO Adalbert Lechner के इस्तीफे के बाद निवेशक कंपनी के बोर्ड में बड़े बदलाव की मांग कर रहे हैं। कंपनी के शेयर में साल 2026 में **25%** की गिरावट आई है और एग्रेसिव प्राइसिंग की वजह से सेल्स गाइडेंस में भी कटौती करनी पड़ी है।
मैनेजमेंट संकट और निवेशकों का दबाव
Lindt & Sprüngli के भीतर लीडरशिप संकट एक नया मोड़ ले चुका है। संस्थागत निवेशक अब कंपनी के बोर्ड के स्ट्रक्चर में पूरी तरह से बदलाव की मांग कर रहे हैं। यह घटनाक्रम अक्टूबर 2026 में CEO Adalbert Lechner के जाने के बाद शुरू हुआ, जब कंपनी को लगातार दो बार सेल्स वॉर्निंग जारी करनी पड़ी। हालांकि कंपनी ने पूर्व CEO Dieter Weisskopf को अंतरिम लीडर बनाया है, लेकिन शेयरधारकों का मानना है कि यह कदम कंपनी की गवर्नेंस और रणनीतिक खामियों को दूर करने के लिए काफी नहीं है।
क्यों फिसला शेयर का भाव?
कंपनी के खराब परफॉर्मेंस का मुख्य कारण साल 2026 में अब तक आई 25% की गिरावट है। इसकी जड़ में कंपनी की 'एग्रेसिव प्राइसिंग' रणनीति है, जिसे हाई कमोडिटी कॉस्ट को कवर करने के लिए अपनाया गया था। साल 2025 में 19% और 2026 की पहली छमाही में 12% तक दाम बढ़ाने के बाद ग्राहकों ने चॉकलेट खरीदने में कमी कर दी। नतीजतन, कंपनी को अपनी ऑर्गेनिक सेल्स ग्रोथ का अनुमान घटाकर 0% से 2% के बीच करना पड़ा है।
गवर्नेंस पर उठते सवाल
निवेशकों और मैनेजमेंट के बीच झगड़े का बड़ा कारण बोर्ड की 'स्वतंत्रता' है। चेयरमैन Ernst Tanner पिछले 32 सालों से कंपनी की कमान संभाले हुए हैं। आलोचकों का कहना है कि वर्तमान में बोर्ड के 8 सदस्यों में से केवल 3 सदस्य ही इंडिपेंडेंस क्राइटेरिया को पूरा करते हैं। इसके अलावा, चेयरमैन के ऑफिस से जुड़ी पेंशन फंड्स का वोटिंग पावर पर बड़ा दबदबा है, जो बोर्ड के निष्पक्ष कामकाज पर सवाल खड़े करता है।
आगे की राह
कंपनी फिलहाल 6% से 8% की मीडियम-टर्म ग्रोथ का टारगेट बचाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, बाजार में GLP-1 वेट-लॉस दवाओं के असर को लेकर भी चर्चा है, जिसका सीधा असर कंफेक्शनरी सेक्टर पर पड़ सकता है। अब निवेशकों की नजर इस पर है कि परमानेंट CEO की तलाश कब पूरी होती है और क्या कंपनी बिना प्राइसिंग बिगाड़े सेल्स वॉल्यूम वापस हासिल कर पाती है या नहीं।
