Gerua: युवा प्रोफेशनल्स के लिए वर्कवियर की नई पहचान
Libas, जो सीधा ग्राहकों को अपने प्रोडक्ट बेचने (Direct-to-Consumer) वाला फैशन ब्रांड है, उसने Gerua नाम से एक नया वर्कवियर लेबल लॉन्च किया है। यह ब्रांड खास तौर पर 18 से 30 साल के युवा प्रोफेशनल्स और पहली बार नौकरी शुरू करने वाले लोगों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। Gerua किफायती, फंक्शनल और मॉडर्न स्टाइल पर फोकस करता है, जिसमें कुर्ते ₹499 से लेकर ₹2,500 तक की कीमत में मिलेंगे। यह ब्रांड मुख्य रूप से ऑनलाइन काम करेगा, जिससे कंपनी को डेटा-बेस्ड ग्रोथ हासिल करने में मदद मिलेगी। Gerua की रणनीति का एक बड़ा हिस्सा इसका AI-फर्स्ट प्लेटफॉर्म है, जिसका इस्तेमाल डिमांड का अनुमान लगाने, डिजाइन तय करने और मार्केटिंग विजुअल्स बनाने में किया जाएगा। यह फैशन रिटेल में AI के बढ़ते इस्तेमाल को दिखाता है, जो एफिशिएंसी बढ़ाने और पर्सनलाइज्ड अनुभव देने में मदद करता है। Gerua हर महीने नए कलेक्शन लॉन्च करने की योजना बना रहा है, जिसमें शुरुआत में 80-200 आइटम होंगे।
Libas के कोर बिजनेस में मजबूती और विस्तार
Gerua के लॉन्च के साथ-साथ, Libas अपने मुख्य एथनिक वियर बिजनेस को भी तेजी से आगे बढ़ा रहा है। कंपनी ₹1,000 करोड़ के सालाना रन रेट (Annual Run Rate - ARR) को पार कर चुकी है और FY2026 तक लगभग 30% ईयर-ऑन-ईयर (Year-on-Year) ग्रोथ की उम्मीद कर रही है, जबकि कंपनी मुनाफे में भी है। ऑनलाइन बिक्री फिलहाल 70% रेवेन्यू का हिस्सा है। Libas अपनी फिजिकल मौजूदगी को भी तेजी से बढ़ा रहा है, FY2026 में 28 नए स्टोर खोले हैं, जो पिछले साल के 10 स्टोर से काफी ज्यादा हैं। अगले दो सालों में 200 से ज्यादा स्टोर खोलने की योजना है। इन नए स्टोर्स ने पहले ही ₹100 करोड़ से ज्यादा की बिक्री की है।
IPO की तैयारी भी जारी
इन सबके बीच, Libas अगले 12-18 महीनों में एक संभावित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (Initial Public Offering - IPO) पर भी विचार कर रहा है।
बाजार की चाल और चुनौतियाँ
भारत में वर्कवियर बाजार काफी बड़ा और तेजी से बढ़ रहा है, जिसके 2028 तक $12 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। Gerua की कीमतों, जिनमें ज्यादातर आइटम ₹2,500 से कम हैं, इसे Blackberrys और Peter England जैसे ब्रांड्स से मुकाबला करना होगा। Libas का अनुमान है कि Gerua दो साल में ₹200-250 करोड़ का ब्रांड बन सकता है। हालांकि, कंपनी के सामने कई चुनौतियाँ भी हैं। मौजूदा बाजार की अस्थिरता और वैश्विक तनाव IPO में देरी कर सकते हैं। कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और शिपिंग खर्च भी मुनाफे के मार्जिन पर दबाव डाल रहे हैं। FY24 में, विज्ञापन और स्टाफ पर बढ़े खर्च के कारण मुनाफे में 64% की गिरावट आई थी।
