Lenskart Solutions ने सोमवार को एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए ₹1 लाख करोड़ (1 Trillion) का मार्केट कैपिटलाइजेशन पार कर लिया। शेयर की कीमत इंट्रा-डे में ₹583 तक चढ़ गई। इस साल अब तक शेयर **33%** बढ़ चुका है।
Lenskart Solutions ने रचा इतिहास!
Lenskart Solutions ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में इतिहास रच दिया। कंपनी का मार्केट कैप ₹1 लाख करोड़ के पार चला गया। इसी के साथ, स्टॉक की कीमत इंट्रा-डे में ₹583 के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। यह तेजी तब आई है जब इसी साल अब तक शेयर 33% का शानदार रिटर्न दे चुका है। वहीं, इसी अवधि में BSE Sensex में 7.7% की गिरावट देखने को मिली है।
दमदार नतीजों का असर
कंपनी की इस रिकॉर्ड ग्रोथ की वजह भारत के आईवियर रिटेल सेक्टर में उसका मजबूत दबदबा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए, Lenskart ने ₹8,988.34 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल से 28.2% ज्यादा है। वहीं, नेट प्रॉफिट ₹500.95 करोड़ रहा, जिसमें 68.5% का इजाफा हुआ। कंपनी का बिजनेस मॉडल, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल स्टोर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इंटीग्रेशन शामिल है, एक ऐसे मार्केट को टारगेट करता है जहां अभी भी काफी संभावनाएं हैं।
निवेशकों की रणनीति में बदलाव
हाल के दिनों में बड़े निवेशकों ने Lenskart में अपनी पोजीशन बदली है। जुलाई 2026 में, Temasek-backed MacRitchie Investments ने अपनी सीधी हिस्सेदारी 4.26% से घटाकर 2.21% कर ली। इससे पहले जून 2026 में, SoftBank ने भी 3.25% स्टेक बेचकर अपनी हिस्सेदारी 9.88% कर दी थी। हालांकि, इन बड़े निवेशकों की बिकवाली के बावजूद, नए इंस्टीट्यूशनल इंटरेस्ट ने बाजार को राहत दी है। इसी महीने, Goldman Sachs और Morgan Stanley जैसी ग्लोबल फर्मों ने ओपन मार्केट ट्रांजैक्शन के जरिए 2.3% स्टेक खरीदा है, जो बड़े खिलाड़ियों की निरंतर रुचि को दर्शाता है।
वैल्यूएशन और भविष्य की चुनौतियाँ
मार्केट कैप और स्टॉक प्राइस की यह तेजी निवेशकों के भरोसे को दिखाती है, लेकिन कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है। स्टॉक फिलहाल 200 से ऊपर के प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है, जो कि काफी हाई वैल्यूएशन माना जाता है। हाई वैल्यूएशन का मतलब है कि बाजार ने पहले से ही भविष्य की काफी ग्रोथ को प्राइस इन कर लिया है, जिससे गलती की गुंजाइश कम हो जाती है।
इसके अलावा, सालान मुनाफे में बढ़ोतरी के बावजूद, मार्च 2026 तिमाही में कंपनी को चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। इन्वेंट्री और कंपोनेंट की बढ़ती लागत के कारण नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 7.5% की गिरावट आई थी। यह उतार-चढ़ाव प्रॉफिट मार्जिन पर बढ़ते दबाव को दिखाता है, क्योंकि कंपनी तेजी से विस्तार के साथ-साथ परिचालन खर्चों को भी मैनेज कर रही है।
निवेशकों की निगाहें अब इस बात पर होंगी कि Lenskart नए स्टोर्स जोड़ने और डिजिटल व स्मार्ट आईवियर कैटेगरी में विस्तार के अपने लक्ष्य को हासिल करते हुए इन लागतों को कैसे मैनेज करती है। चूंकि कंपनी फिलहाल कोई डिविडेंड नहीं देती है, शेयरधारकों के लिए कुल रिटर्न पूरी तरह से स्टॉक प्राइस की बढ़ोतरी पर निर्भर करता है। इसलिए, तिमाही नतीजों की निरंतरता और स्टोर विस्तार योजनाओं का सफल कार्यान्वयन महत्वपूर्ण होगा।
