नतीजों का धमाका: Lenskart के शेयर में तूफानी उछाल
Lenskart Solutions के लिए Q3 FY26 (जो 31 दिसंबर, 2025 को खत्म हुआ) के नतीजे बेहद शानदार रहे। कंपनी ने पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले अपने रेवेन्यू में लगभग 38% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की, जो ₹2,308 करोड़ तक पहुंच गया। वहीं, कंपनी के नेट प्रॉफिट में तो जैसे पंख लग गए, यह बढ़कर ₹131-133 करोड़ पर पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह सिर्फ ₹1.8 करोड़ था। कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी भी बढ़ी, EBITDA मार्जिन 14.5% से बढ़कर 20.0% हो गया।
इस बेहतरीन परफॉरमेंस के चलते 12 फरवरी, 2026 को Lenskart के शेयर रॉकेट की तरह भागे और 12-13% उछलकर ₹526.35 के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गए। ट्रेडिंग वॉल्यूम भी सामान्य से कई गुना ज्यादा देखा गया। 19 फरवरी, 2026 तक शेयर ₹480.35 के आसपास ट्रेड कर रहे थे। एनालिस्ट्स कंपनी के ग्रोथ पर काफी बुलिश हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि अगले 2028 तक कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 53% और फ्री कैश फ्लो 70% बढ़ सकता है।
###valuation का सवाल: क्या है असली पिक्चर?
Natijon के इस उछाल के बावजूद, Lenskart काvaluation एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। कंपनी का मार्केट कैप ₹83,000 करोड़ से ऊपर है और P/E रेश्यो फरवरी 2026 के मध्य में 220 से 439x तक था। यह इस सेक्टर की स्थापित कंपनियों जैसे Titan Company के मुकाबले काफी ज्यादा है, जिनका P/E रेश्यो 78-92 के आसपास है।
यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह प्रीमियमvaluation टिका रह पाएगा, खासकर तब जब कंज्यूमर स्पेंडिंग थोड़ी संभलकर हो रही है। महंगाई और नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, जिससे लोग सोच-समझकर खर्च कर रहे हैं। हालांकि, भारतीय रिटेल सेक्टर में ग्रोथ की उम्मीदें बनी हुई हैं, लेकिन यह नई कंज्यूमर बिहेवियर Lenskart के आक्रामक ग्रोथ टारगेट के लिए चुनौती बन सकती है।
जोखिम और चिंताएं: कहां छिपे हैं 'Bear Case' के संकेत?
Lenskart के हाई P/E रेश्यो का मतलब है कि मार्केट मौजूदा प्राइस पर भविष्य की भारी ग्रोथ का अनुमान लगा रहा है। अगर ग्रोथ की रफ्तार धीमी हुई या मार्जिन पर दबाव आया, तो valuation में बड़ी गिरावट आ सकती है। नवंबर 2025 में हुए IPO की लिस्टिंग भी उम्मीद से कमजोर रही थी, जो शायद बाजार की शुरुआती शंकाओं को दिखा रही थी।
इसके अलावा, पिछले तीन सालों में Lenskart का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) औसतन सिर्फ 1.16% रहा है और प्रमोटर होल्डिंग भी 17.6% के आसपास है। 2022 में कंपनी पर फ्रेंचाइजी मुकदमे, कमीशन में गड़बड़ी और ED (Enforcement Directorate) नोटिस जैसी कुछ पुरानी समस्याएं भी रही हैं, जो एक तरह का रेपुटेशन रिस्क पैदा करती हैं। कंपनी की बड़ी इंटरनेशनल एक्सपेंशन योजनाओं में भी एग्जीक्यूशन रिस्क शामिल है।
आगे क्या? भविष्य का अनुमान
Lenskart का मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी, वर्टिकल इंटीग्रेशन और ओमनीचैनल एक्सपेंशन के जरिए लॉन्ग-टर्म ग्रोथ पर जोर दे रहा है। एनालिस्ट्स का 12 महीने का औसत टारगेट प्राइस ₹531.50 है, और कुछ, जैसे Motilal Oswal, ने इसे ₹600 तक का टारगेट दिया है। कंपनी 19-24 फरवरी, 2026 के बीच एनालिस्ट्स और इन्वेस्टर्स के साथ मीटिंग करेगी, जिससे कंपनी की स्ट्रेटेजी पर और क्लैरिटी मिलेगी।
बाजार इस बात पर बारीकी से नजर रखेगा कि क्या Lenskart लगातार और प्रॉफिटेबल ग्रोथ के जरिए अपने प्रीमियमvaluation को सही साबित कर पाता है या मौजूदा तेजी में कुछ छुपे हुए जोखिमों को नजरअंदाज किया जा रहा है।