Lenskart Share Price: ब्रोकरेज ने दिया 'Buy' रेटिंग, टारगेट ₹535! पर क्या वैल्यूएशन है सही?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Lenskart Share Price: ब्रोकरेज ने दिया 'Buy' रेटिंग, टारगेट ₹535! पर क्या वैल्यूएशन है सही?
Overview

Lenskart Solutions के शेयर आज **1.95%** चढ़ गए। इसकी वजह है ब्रोकरेज फर्म JM Financial का कंपनी पर 'Buy' रेटिंग के साथ **₹535** का टारगेट प्राइस देना। यह तेजी कंपनी के टेक-ड्रिवन ग्रोथ, वर्टिकल इंटीग्रेशन और ओमनीचैनल एक्सपेंशन पर आधारित है।

विश्लेषकों का भरोसा, शेयर में आई तेजी

Lenskart Solutions के निवेशकों के लिए आज का दिन खास रहा। ब्रोकरेज फर्म JM Financial ने कंपनी पर कवरेज शुरू करते हुए इसे 'Buy' रेटिंग दी है और शेयर के लिए ₹535 का टारगेट प्राइस सेट किया है। इस रिपोर्ट के आते ही Lenskart के शेयरों में 1.95% की तेजी देखी गई, जो BSE Sensex के 0.34% के बढ़त से कहीं बेहतर है। ब्रोकरेज फर्म का भरोसा कंपनी की टेक्नोलॉजी-आधारित ग्रोथ, पूरी तरह से इंटीग्रेटेड बिजनेस मॉडल और ओमनीचैनल (Omnichannel) विस्तार की रणनीति पर टिका है।

JM Financial की नजर में Lenskart क्यों है खास?

JM Financial Institutional Securities ने Lenskart पर अपनी पहली रिपोर्ट में इसे 'Buy' रेटिंग देते हुए ₹535 का लक्ष्य रखा है, जो मौजूदा भाव से करीब 13% की और तेजी का संकेत देता है। फर्म का मानना ​​है कि Lenskart की ग्रोथ का विजन (Visibility) काफी साफ है। कंपनी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके अपने ऑपरेशन्स को बेहतर बना रही है, अपने पूरे सप्लाई चेन को कंट्रोल करती है (Vertical Integration) और ओमनीचैनल (Omnichannel) यानी ऑनलाइन-ऑफलाइन दोनों प्लेटफॉर्म पर लगातार विस्तार कर रही है। Lenskart के पास फिलहाल भारत के 431 शहरों में 2,270 स्टोर्स हैं, और सितंबर 2025 तक 679 अंतरराष्ट्रीय आउटलेट्स भी थे। हालांकि, कंपनी की मार्केट हिस्सेदारी अभी करीब 5% है, लेकिन टेक्नोलॉजी पर इसका दशक पुराना फोकस, सेंट्रलाइज्ड ऑपरेशन्स जैसे कि सेंट्रलाइज्ड आई टेस्टिंग से कॉस्ट में कमी और 'Tango' जैसे सेल्स असिस्टेंट टूल और 'GeoIQ' जैसे स्टोर एक्सपेंशन टूल इसे अलग बनाते हैं। इन सब की मदद से कंपनी अपने स्टोर का पेबैक पीरियड (Payback Period) सिर्फ 10 महीने में हासिल कर लेती है।

भारतीय चश्मे (Eyewear) का बाजार और Lenskart की रणनीति

भारतीय Eyewear बाजार बहुत बड़ा है और तेजी से बढ़ रहा है। 2025 फाइनेंशियल ईयर में इसकी वैल्यू करीब ₹78,800 करोड़ थी, और 2030 फाइनेंशियल ईयर तक यह 13% के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ने की उम्मीद है। आंखों की समस्याएं बढ़ना, लोगों का ब्रांडेड चश्मे की ओर बढ़ना, और संगठित (Organized) रिटेल का बढ़ना इसके मुख्य कारण हैं। अनऑर्गेनाइज्ड (Unorganized) से ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर में शिफ्ट होने से 2025 में जहां यह हिस्सा 24% था, वहीं 2030 तक 31% हो जाने का अनुमान है। Lenskart का अपना मैन्युफैक्चरिंग और फुलफिलमेंट सेंटर होने से इसे इंडस्ट्री के बाकी प्लेयर्स की तुलना में 35-40% का कॉस्ट एडवांटेज मिलता है। इसी वजह से वे कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग रख पाते हैं और अच्छा मुनाफा कमा पाते हैं। JM Financial का अनुमान है कि Lenskart FY25 से FY28E के बीच अपने रेवेन्यू में 23% CAGR, Ebitda में 50% CAGR और EPS में 55% CAGR से ग्रोथ हासिल करेगी। ब्रोकरेज फर्म डिस्काउंटेड कैश फ्लो (DCF) मेथड का इस्तेमाल कर रही है, जिसके अनुसार दिसंबर 2027 तक Lenskart का EV/EBITDA मल्टीपल 54x हो सकता है। फिलहाल, Lenskart का EV/EBITDA मल्टीपल FY28E के लिए 44x बताया जा रहा है।

वैल्यूएशन पर सवाल: क्या प्रीमियम जायज है?

Lenskart की ग्रोथ कहानी दमदार है, लेकिन इसके वैल्यूएशन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। FY28E के लिए 44x EV/EBITDA का मल्टीपल, जिसे DMart और Titan जैसे स्थापित प्लेयर्स से प्रीमियम बताया जा रहा है, वह थोड़ी चिंता की बात है। कुछ विश्लेषकों का मानना ​​है कि अन्य स्थापित कंपनियों के भविष्य के मल्टीपल्स भी इसी रेंज या इससे भी ऊपर हो सकते हैं, जिससे Lenskart का यह प्रीमियम दावा थोड़ा अतिशयोक्तिपूर्ण लग सकता है। एक प्राइवेट कंपनी होने के नाते, Lenskart की फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी (Financial Transparency) और ऑडिट ट्रेल्स पब्लिकली लिस्टेड कंपनियों जितने मजबूत नहीं हैं। ऐसे में, कंपनी के आक्रामक ग्रोथ अनुमानों और कॉस्ट एफिशिएंसी (Cost Efficiency) को बाहरी निवेशकों के लिए वेरिफाई करना मुश्किल हो सकता है। Titan (Titan Eyeplus के जरिए) और Avenue Supermarts (DMart) जैसी दिग्गज कंपनियां भी Eyewear सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं, जो Lenskart के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा पेश करती हैं। कंपनी की FY28E तक 550 नए स्टोर्स खोलने और अगले दशक में 9,000-9,500 तक स्टोर्स तक पहुंचने की योजना में बड़े एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk) शामिल हैं, खासकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में। कड़ी प्रतिस्पर्धा और संभावित महंगाई के बीच मार्जिन बनाए रखना कंपनी की ग्रोथ और वैल्यूएशन को सही ठहराने के लिए बेहद जरूरी होगा।

भविष्य की राह: ग्रोथ की उम्मीदें और चुनौतियाँ

JM Financial की भविष्यवाणियों के अनुसार, Lenskart आने वाले तीन फाइनेंशियल ईयर में करीब 550 नए स्टोर खोल सकती है और रेवेन्यू, Ebitda और EPS में शानदार ग्रोथ रेट हासिल कर सकती है। कंपनी की लॉन्ग-टर्म विजन 9,000-9,500 ग्लोबल स्टोर्स तक पहुंचने की है, जो Eyewear मार्केट पर हावी होने की बड़ी महत्वाकांक्षा दिखाती है। भारत और उभरते बाजारों में Eyewear पेनिट्रेशन (Penetration) का बढ़ना और बाजार का औपचारिकरण (Formalization) Lenskart के विस्तार के लिए उपजाऊ जमीन तैयार करता है। हालांकि, इस पूरी क्षमता को हासिल करने के लिए कंपनी को अपने एग्जीक्यूशन को flawless रखना होगा, लगातार इनोवेशन करना होगा और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपने प्रीमियम वैल्यूएशन को साबित करना होगा।

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