गोवा की Latambarcem Brewers, जो MakaDi बीयर और Borecha फंक्शनल ड्रिंक्स बनाती है, ने अगले पांच सालों में ₹500 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इस ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए कंपनी फ्यूचर में IPO लाने की योजना बना रही है और क्वालिटी कंट्रोल के लिए एसेट-हैवी मैन्युफैक्चरिंग मॉडल पर टिके रहने का फैसला किया है।
क्या हुआ?
गोवा की स्टार्टअप Latambarcem Brewers (LB Brewers), जो क्राफ्ट बीयर ब्रांड MakaDi और फंक्शनल बेवरेज लाइन Borecha के पीछे है, ने अपनी महत्वाकांक्षी ग्रोथ योजनाओं का ऐलान किया है। कंपनी का लक्ष्य अगले चार से पांच सालों में अपना सालाना रेवेन्यू बढ़ाकर ₹500 करोड़ करना है। चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए, कंपनी अपने सेल्स का अनुमान ₹60 करोड़ लगा रही है, जो पिछले साल के ₹24 करोड़ से काफी ज्यादा है।
अपनी लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी के तहत, कंपनी विस्तार के लिए फंड जुटाने के उद्देश्य से मिड-टर्म में इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए तैयारी कर रही है। कंपनी ने हाल ही में 'Life6' नामक CoQ10-इन्फ्यूज्ड फंक्शनल वॉटर लॉन्च करके अपने पोर्टफोलियो का विस्तार भी किया है। जहां कंपनी का क्राफ्ट बीयर डिवीजन 10 राज्यों में ऑपरेट करता है, वहीं वह फिलहाल इंटरनेशनल एक्सपेंशन पर फोकस कर रही है और प्रमुख भारतीय बाजारों में अपनी मौजूदगी को गहरा करने की योजना बना रही है।
बिजनेस स्ट्रैटेजी: एसेट-हैवी मॉडल
कई कंज्यूमर ब्रांड्स के विपरीत जो एसेट-लाइट अप्रोच चुनते हैं (यानी थर्ड-पार्टी को प्रोडक्शन आउटसोर्स करते हैं), LB Brewers ने एसेट-हैवी मॉडल को अपनाया है। इसका मतलब है कि कंपनी सीधे अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स, कैनिंग लाइन्स और प्रोडक्शन इक्विपमेंट में इन्वेस्ट करती है।
मैनेजमेंट का जोर इस बात पर है कि यह तरीका उन्हें अपने प्रोप्राइटरी रेसिपीज और प्रोडक्शन प्रोसेस पर बेहतर कंट्रोल देता है। हालांकि, इस स्ट्रैटेजी के लिए काफी कैपिटल स्पेंडिंग की जरूरत होती है। इन्वेस्टर्स के लिए, यह मॉडल कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग की तुलना में अक्सर हाई फिक्स्ड कॉस्ट की ओर ले जाता है, जिसका मतलब है कि कंपनी को यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार हाई सेल्स वॉल्यूम बनाए रखना होगा कि मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज एफिशिएंट और प्रॉफिटेबल रहें।
क्यों मायने रखता है यह सेक्टर?
भारत में क्राफ्ट बेवरेज इंडस्ट्री तेजी से बढ़ी है, जिसका मुख्य कारण कंज्यूमर्स की बदलती पसंद है जो यूनिक फ्लेवर और हेल्दी ऑल्टरनेटिव्स जैसे कोम्बुचा और फंक्शनल वॉटर की ओर आकर्षित हो रहे हैं। हालांकि, भारत में अल्कोहल इंडस्ट्री अत्यधिक रेगुलेटेड है, जिसमें एक्साइज लॉ और डिस्ट्रीब्यूशन पॉलिसी हर राज्य में काफी अलग हैं।
यह रेगुलेटरी लैंडस्केप अक्सर एंट्री और एक्सपेंशन के लिए एक बाधा के रूप में कार्य करता है। इसके अलावा, यह स्पेस स्थापित कमर्शियल बीयर ब्रांड्स और अन्य उभरते क्राफ्ट प्लेयर्स के साथ तेजी से भीड़ भरा हो रहा है। इस माहौल में सफलतापूर्वक स्केल करने के लिए न केवल एक पॉपुलर प्रोडक्ट की जरूरत होती है, बल्कि मजबूत सप्लाई चेन मैनेजमेंट और जटिल, राज्य-विशिष्ट लिकर रेगुलेशन्स को नेविगेट करने की क्षमता भी चाहिए।
इन्वेस्टर इसे कैसे देख सकते हैं?
जहां ₹500 करोड़ के रेवेन्यू का लक्ष्य ब्रांड की क्षमता में मजबूत आत्मविश्वास दिखाता है, वहीं इन्वेस्टर्स आम तौर पर बैलेंस्ड ग्रोथ की तलाश में रहते हैं। एक प्राइवेट स्टार्टअप से पोटेंशियल पब्लिक एंटिटी बनने के लिए हायर स्टैंडर्ड्स ऑफ गवर्नेंस, प्रॉफिटेबिलिटी और फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी को पूरा करने की आवश्यकता होती है।
कंपनी का एसेट-हैवी मॉडल, क्वालिटी सुनिश्चित करने के साथ-साथ, प्रॉफिटेबिलिटी के लिए एक उच्च बाधा पैदा करता है। यदि प्रोडक्शन वॉल्यूम उम्मीद के मुताबिक स्केल नहीं होता है, तो इन एसेट्स के डेप्रिसिएशन और फिक्स्ड कॉस्ट प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकते हैं। इसके विपरीत, यदि ब्रांड सफलतापूर्वक स्केल करता है, तो एसेट-हैवी मॉडल लंबे समय में उन कंपटीटर्स की तुलना में मार्जिन पर बेहतर नियंत्रण प्रदान कर सकता है जो एक्सटर्नल मैन्युफैक्चरिंग पर निर्भर करते हैं।
इन्वेस्टर्स को आगे क्या ट्रैक करना चाहिए?
कंपनी की प्रगति पर नजर रखने वालों के लिए, मुख्य मॉनिटरेबल्स में रेवेन्यू ग्रोथ की कंसिस्टेंसी और सस्टेन्ड प्रॉफिटेबिलिटी का रास्ता शामिल है। इन्वेस्टर्स यह देख सकते हैं कि कंपनी नए मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी में निवेश जारी रखते हुए अपने डेट-टू-इक्विटी रेशियो को कैसे मैनेज करती है।
ट्रैक करने के लिए भविष्य के डेवलपमेंट्स में 'Life6' फंक्शनल वॉटर का सफल रोलआउट, प्रस्तावित IPO की टाइमलाइन और अल्कोहलिक बेवरेजेज के लिए रेगुलेटरी एनवायरनमेंट में कोई भी महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं जो डिस्ट्रीब्यूशन को प्रभावित कर सकते हैं। विभिन्न भारतीय राज्यों में बिखरे हुए अल्कोहल पॉलिसीज को नेविगेट करने में मैनेजमेंट की क्षमता भी कंपनी की लॉन्ग-टर्म सक्सेस के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर बनी रहेगी।
