अपीलेट ऑर्डर का आया फैसला
LT Foods को एक बड़ा झटका लगा है। कमिश्नर ऑफ CGST (Appeals-II), दिल्ली के एक अपीलेट ऑर्डर ने कंपनी के खिलाफ ₹32.41 करोड़ के गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) डिमांड को कन्फर्म कर दिया है। यह ऑर्डर 30 जनवरी, 2026 को जारी किया गया था और यह जनवरी 2025 के उस पिछले फैसले को पलट देता है जिसने इस डिमांड को बासमती राइस उत्पादक के खिलाफ खारिज कर दिया था।
क्या है पूरा मामला?
यह डिमांड चावल की उन सप्लाई पर GST छूट के गलत इस्तेमाल के आरोपों से जुड़ी है, जो प्लेन पैकेजिंग के बिना सप्लाई किए गए थे। यानी, कंपनी पर आरोप है कि उसने बिना प्लेन पैकेजिंग वाले चावल की सप्लाई पर GST छूट का अनुचित लाभ उठाया।
कंपनी का अगला कदम
LT Foods ने इस मामले पर अपनी स्थिति साफ कर दी है। कंपनी ने बताया है कि वह इस कन्फर्म डिमांड के खिलाफ GST अपीलेट ट्रिब्यूनल में अपील फाइल करेगी। कंपनी का फिलहाल यह मानना है कि इस डेवलपमेंट से कंपनी के फाइनेंशियल या ऑपरेशनल कामकाज पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
क्यों यह खबर अहम है?
LT Foods जानी-मानी FMCG कंपनी है, जो 'Daawat' और 'Royal' जैसे बासमती राइस ब्रांड्स के लिए मशहूर है और 80 से ज्यादा देशों में अपने प्रोडक्ट्स बेचती है। यह मामला GST नियमों के तहत प्रोडक्ट पैकेजिंग और उससे जुड़ी छूटों पर रेगुलेटरी जांच का संकेत देता है।
आगे क्या देखना होगा?
अब कंपनी को GST अपीलेट ट्रिब्यूनल में अपनी अपील के लिए एक मजबूत केस तैयार करना होगा। अगर अपील सफल नहीं होती है, तो कंपनी को ₹32.41 करोड़ की डिमांड, साथ ही लागू इंटरेस्ट और पेनल्टी का भुगतान करना पड़ सकता है। यह स्थिति agri-food सेक्टर की कंपनियों के लिए GST रेगुलेशंस का कड़ाई से पालन करने की अहमियत को भी रेखांकित करती है।
इंडस्ट्री में क्या है स्थिति?
यह स्थिति चावल उद्योग में अन्य बड़ी कंपनियों के लिए भी एक तरह का अलर्ट है। उदाहरण के तौर पर, KRBL लिमिटेड जैसी कंपनियों को भी पहले रेगुलेटरी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जैसे कि बासमती राइस मानकों के अनुपालन में कमी के लिए कस्टम्स द्वारा जुर्माना। यह दर्शाता है कि रेगुलेटरी अनुपालन इस सेक्टर के बड़े खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण परिचालन पहलू है।