L'Oreal, Galderma और Natura जैसी कॉस्मेटिक कंपनियां अब वजन घटाने वाली दवाओं (GLP-1) के कारण होने वाले 'Ozempic face' के असर से निपटने के लिए नई प्रोडक्ट रणनीति बना रही हैं। अगले पांच वर्षों में इस बाजार के **$2 बिलियन** तक पहुंचने का अनुमान है, लेकिन एक्सपर्ट्स अभी भी इसके नतीजों को लेकर सतर्क हैं।
तेजी से वजन कम करने वाली GLP-1 दवाओं के इस्तेमाल से चेहरों पर दिखने वाले 'Ozempic face' (त्वचा का ढीलापन और वॉल्यूम कम होना) को लेकर अब कॉस्मेटिक दिग्गजों ने कमर कस ली है। हालांकि यह असर दवाओं का सीधा साइड इफेक्ट नहीं, बल्कि वजन कम होने का एक शारीरिक परिणाम है, लेकिन इसकी商业 (Commercial) संभावनाओं ने कंपनियों को नई रिसर्च के लिए प्रेरित किया है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि वेट-लॉस पेशेंट्स के लिए एस्थेटिक ट्रीटमेंट का मार्केट $700 मिलियन से बढ़कर अगले पांच वर्षों में $2 बिलियन तक पहुंच सकता है।\n\n### कंपनियों की क्या है तैयारी?\n\nL'Oreal के 20% मालिकाना हक वाली कंपनी Galderma अपने मौजूदा इंजेक्टेबल प्रोडक्ट्स जैसे Sculptra और Restylane का वेट-लॉस मरीजों पर प्रभाव चेक कर रही है। वहीं, L'Oreal ने खुद भी इन दवाओं के असर को समझने के लिए डेडिकेटेड स्टडीज शुरू कर दी हैं। ब्राजील की ब्यूटी फर्म Natura भी इस दौड़ में शामिल होकर अपने मौजूदा प्रोडक्ट्स के साथ-साथ 'इंजेस्टिबल्स' (Ingestibles) यानी सप्लीमेंट्स पर भी विचार कर रही है।\n\n### एक्सपर्ट्स और निवेशकों के लिए चेतावनी\n\nमेडिकल एक्सपर्ट्स और डर्मेटोलॉजिस्ट्स का मानना है कि केवल क्रीम या सीरम से त्वचा की अंदरूनी संरचना या फैट पैड्स की कमी को ठीक करना मुमकिन नहीं है। चूंकि वजन घटाने वाली दवाओं का उपयोग करने वाले लोग अक्सर ऐसी उम्र के होते हैं जहां कोलाजन और एस्ट्रोजन का स्तर पहले से कम हो रहा होता है, इसलिए यह फर्क करना मुश्किल है कि स्किन की समस्या का मुख्य कारण वेट-लॉस है या उम्र का असर। निवेशकों को सलाह है कि वे केवल मार्केटिंग के दावों पर नहीं, बल्कि प्रोडक्ट की क्लिनिकल परफॉर्मेंस और रेगुलेटरी क्लीयरेंस पर नजर रखें।
