Kotak Institutional Equities का अनुमान है कि जून तिमाही में कंज्यूमर स्टेपल्स सेक्टर में अच्छी ग्रोथ बनी रहेगी, मार्जिन भी स्थिर रहने की उम्मीद है। वहीं, ज्वैलरी और पेंट्स में डिमांड मजबूत रहने के बावजूद, टोबैको और पैक्ड फूड्स जैसी डिस्क्रिशनरी चीजों में वॉल्यूम पर दबाव दिख सकता है।
कंज्यूमर सेक्टर की तैयारी: दो हिस्सों में बंटी तस्वीर
जैसे-जैसे जून तिमाही के नतीजे आने वाले हैं, कंज्यूमर कंपनियों के लिए तस्वीर दो हिस्सों में बंटती दिख रही है - एक तरफ कंज्यूमर स्टेपल्स (रोजमर्रा की जरूरत की चीजें) हैं, तो दूसरी तरफ डिस्क्रिशनरी (वैकल्पिक) सेक्टर। Kotak Institutional Equities की रिपोर्ट के मुताबिक, कंज्यूमर स्टेपल्स सेक्टर में ग्रोथ ठीक-ठाक बने रहने की उम्मीद है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि कंपनियां इन्वेंट्री कॉस्ट (भंडार की लागत) को बखूबी मैनेज कर रही हैं और सही प्राइसिंग स्ट्रैटेजी अपना रही हैं।
स्टेपल्स और डिस्क्रिशनरी सेक्टर का प्रदर्शन
रिपोर्ट का अनुमान है कि कई बड़े कंज्यूमर स्टेपल्स कंपनियां अच्छी ऑर्गेनिक रेवेन्यू ग्रोथ दिखाएंगी। इसमें Honasa Consumer सबसे आगे रह सकती है, जिसकी ग्रोथ 22% रहने का अनुमान है। इसके बाद Marico 20% और Nestlé India 19.3% की ग्रोथ के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहेंगे। Godrej Consumer Products, Tata Consumer Products, Colgate-Palmolive India, Hindustan Unilever, Dabur और Britannia Industries जैसी कंपनियों से 9.5% से 12.5% तक की ग्रोथ की उम्मीद है। इन कंपनियों को स्थिर इनपुट कॉस्ट का फायदा मिल रहा है, जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन को सपोर्ट मिल रहा है।
वहीं, डिस्क्रिशनरी सेक्टर में परफॉरमेंस मिली-जुली रहने वाली है। Titan Company Limited के लिए अच्छी खबर है, जहां Tanishq ज्वैलरी की डोमेस्टिक सेल्स में 39% की जोरदार बढ़ोतरी और ज्वैलरी सेगमेंट में 31% EBIT बढ़ने का अनुमान है। Pidilite Industries भी 18% रेवेन्यू ग्रोथ के साथ मजबूत तिमाही की उम्मीद कर रहा है। लेकिन, दूसरी तरफ ITC Limited को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। टैक्स के कारण कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सिगरेट वॉल्यूम में 9% की गिरावट आ सकती है। इससे कंपनी के नेट रेवेन्यू और EBIT पर असर पड़ सकता है। इसी तरह, Jubilant FoodWorks से उम्मीदें थोड़ी कम हैं।
प्रॉफिटेबिलिटी को क्या करेगा प्रभावित?
निवेशकों के लिए प्रॉफिट मार्जिन एक अहम मुद्दा बना हुआ है। हालांकि, ओवरऑल सेक्टर में EBITDA मार्जिन में बहुत बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिलेगा। कंपनियां प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखने के लिए कीमतों में बदलाव और कम लागत वाले इन्वेंट्री का इस्तेमाल कर रही हैं। साथ ही, कई फर्मों ने एडवरटाइजिंग खर्च को भी कम किया है, जिससे उनके बॉटम लाइन को और सपोर्ट मिला है।
निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बातें यह होंगी कि कंपनियां बढ़ती महंगाई के माहौल में वॉल्यूम ग्रोथ को कैसे मैनेज करती हैं और क्या ज्वैलरी और पेंट्स की डिमांड उम्मीद के मुताबिक बनी रहती है। आने वाले समय में रॉ मटेरियल की कीमतों और कस्टमर की महंगे डिस्क्रिशनरी आइटम्स के प्रति भूख पर बारीक नजर रखनी होगी, ताकि यह समझा जा सके कि कंपनियां इस फाइनेंशियल ईयर के बाकी हिस्सों में अपनी मार्जिन की स्थिरता बनाए रख पाएंगी या नहीं।
