गहराता वित्तीय संकट?
कंपनी के बोर्ड ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही और नौ महीने की अवधि के लिए स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड अन-ऑडिटेड वित्तीय परिणाम तो मंजूर कर लिए हैं, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनी ने अपने रेवेन्यू, प्रॉफिट और अन्य महत्वपूर्ण वित्तीय आंकड़ों का खुलासा नहीं किया है। इस पारदर्शिता की कमी ने निवेशकों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
कंपनी की वित्तीय सेहत पर भारी देनदारियां और कानूनी विवाद हावी हैं। बैंकों ने Kohinoor Foods के खातों को NPA करार दिया है और रिकॉल नोटिस भी जारी कर दिया है। कंपनी ने लेंडर्स के साथ ₹227.45 करोड़ का वन टाइम सेटलमेंट (OTS) पूरा कर लिया है। हालांकि, कंपनी ने NPA बैंक लोन पर ब्याज (तीसरी तिमाही के लिए ₹3780.72 लाख और नौ महीने के लिए ₹83514.80 लाख) और रद्द की गई कॉर्पोरेट गारंटी पर ब्याज (तीसरी तिमाही के लिए ₹80.90 लाख और नौ महीने के लिए ₹1443.94 लाख) का भुगतान नहीं किया है। इसके अलावा, कंपनी ने ₹190.00 करोड़ में अपनी राइस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को बेचा था, जिसकी रकम भी लेंडर्स को ट्रांसफर कर दी गई है।
निवेशकों के लिए बड़े जोखिम
Kohinoor Foods कई कानूनी और नियामक चुनौतियों से जूझ रही है:
- डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT), दिल्ली ने संपत्ति हस्तांतरण पर रोक लगाने का अंतरिम आदेश जारी किया है।
- DRT ने बैंकों को ₹926.13 करोड़ का भुगतान करने का आदेश दिया है।
- सिक्योर्ड क्रेडिटर्स (PNB और IDBI Bank) ने इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत याचिकाएं दायर की हैं।
- फरीदाबाद कोर्ट ने कंपनी की संपत्तियों और एक बैंक खाते को अटैच करने के लिए वारंट जारी किया है।
- SEBI ने कंपनी और उसके डायरेक्टर्स को एक शो कॉज नोटिस भेजा है, जिसके लिए एक सेटलमेंट एप्लीकेशन फाइल की गई है।
- नगर निगम ने परिसर खाली करने का नोटिस जारी किया है।
कंपनी के स्टेटुटरी ऑडिटर ने 'क्वालिफाइड कंक्लूजन' जारी किया है, जिसमें NPA बैंक लोन और रद्द की गई कॉर्पोरेट गारंटी पर ब्याज का सटीक कुल योग न बता पाने का जिक्र है। इसके अलावा, इनकम टैक्स और GST जैसे सरकारी प्राधिकरणों की मांगों और MSMED एक्ट के तहत आने वाले क्रेडिटर्स पर ब्याज का प्रावधान न करने पर भी 'एम्फसिस ऑफ मैटर' (Emphasis of Matter) डाला गया है।
भविष्य की राह?
इन गंभीर देनदारियों के बावजूद, प्रबंधन का मानना है कि कंपनी एक गोइंग कंसर्न (जारी रहने वाली इकाई) के तौर पर काम कर सकती है, जिसका मुख्य आधार लीड बैंक द्वारा संशोधित OTS की मंजूरी और पूरा भुगतान है। लेकिन, इन सब कानूनी कार्रवाइयों, अप्रदत्त ब्याज देनदारियों, ऑडिटर की रिपोर्ट और मुख्य वित्तीय खुलासों की कमी को देखते हुए, कंपनी के भविष्य पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गया है। निवेशकों को कंपनी की मौजूदा देनदारियों और भविष्य के कानूनी नतीजों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना चाहिए।