केरल में छतरी की बिक्री ठप! कमजोर मॉनसून और बढ़ती लागत ने निर्माताओं को घेरा

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AuthorAditya Rao|Published at:
केरल में छतरी की बिक्री ठप! कमजोर मॉनसून और बढ़ती लागत ने निर्माताओं को घेरा

केरल में छतरी उद्योग इन दिनों मांग में भारी गिरावट का सामना कर रहा है। अनियमित बारिश की वजह से सीजन की बिक्री पर असर पड़ा है। वहीं, फैब्रिक की बढ़ती आयात लागत और दूसरी राज्यों में विस्तार की कोशिशें भी चर्चा में हैं।

Detailed Coverage

मॉनसून की मार, छतरी की मांग पर भारी

केरल में मई से जुलाई का वो समय होता है जब छतरी की बिक्री अपने चरम पर होती है और साल भर की कमाई का एक बड़ा हिस्सा यहीं से आता है। लेकिन इस साल, मॉनसून की बेरुखी ने छतरी निर्माताओं की कमर तोड़ दी है। लगातार बारिश न होने की वजह से लोग नई छतरियां खरीदने से कतरा रहे हैं, जिसके चलते रिटेलरों के पास माल का ढेर लगा है।

लागत का डबल अटैक: शिपिंग और फैब्रिक

मौसम की मार के अलावा, उद्योग पर महंगाई का भी बोझ बढ़ा है। पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण शिपिंग के दाम आसमान छू रहे हैं। साथ ही, अच्छी क्वालिटी के वाटरप्रूफ फैब्रिक की खरीद लागत भी काफी बढ़ गई है। दिक्कत ये है कि ये खास फैब्रिक ज्यादातर ताइवान से इम्पोर्ट होता है, क्योंकि भारत में अभी ऐसे विकल्प उपलब्ध नहीं हैं जो प्रीमियम छतरियों के लिए ज़रूरी क्वालिटी और टिकाऊपन दे सकें।

बिजनेस में लचीलापन और रिटेल की रणनीति

इस मुश्किल दौर में भी, कुछ कंपनियों ने अपनी अलग राह बनाई है। जहां कुछ निर्माता सूखी बिक्री के कारण टारगेट पूरा नहीं कर पा रहे, वहीं कुछ ने दूसरे राज्यों में बिक्री बढ़ाकर अपनी ग्रोथ बनाए रखी है। जॉनस अम्ब्रेला (John's Umbrella) जैसी कंपनी, जो सालाना करीब 24 लाख छतरियां बेचती है, उसने केरल में 12% की ग्रोथ दर्ज की है। यह ग्रोथ उन्होंने अपने घरेलू राज्य में कम हुई मांग को दूसरे राज्यों, जहाँ मॉनसून बेहतर रहा, में बढ़ी हुई बिक्री से संतुलित करके हासिल की है।

इस सीजन में रिटेलरों ने भी समझदारी दिखाई है। कम ग्राहक आने और मौसमी सामानों पर कम खर्च होने की आशंका के चलते, कई दुकानों ने छतरियों का स्टॉक कम कर दिया है, खासकर सस्ती छतरियों का। इस सावधानी भरे स्टॉक प्रबंधन ने निर्माताओं की वॉल्यूम बढ़ाने की कोशिशों को और मुश्किल बना दिया है।

आगे क्या?

निवेशकों और इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ा सवाल मॉनसून का आगे का मिजाज है। क्योंकि यह बिजनेस सीजनल डिमांड पर बहुत निर्भर करता है, इसलिए कंपनियों के लिए स्टॉक मैनेज करना और बढ़ी हुई रॉ मैटेरियल लागत को ग्राहकों पर डालना एक बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा, केरल के बाहर अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को बढ़ाने में कंपनियों की सफलता, भविष्य में मौसम के जोखिमों को कम करने का एक अहम पैमाना साबित होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.