केरल के लीगल मेट्रोलॉजी विभाग ने राज्यभर के सिनेमाघरों में औचक निरीक्षण शुरू कर दिया है। स्नैक्स और टिकटों की महंगी कीमतों को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद यह कार्रवाई की गई है, जिससे मल्टीप्लेक्स ऑपरेटर्स के प्रॉफिट मार्जिन पर असर पड़ सकता है।
मुनाफे पर क्यों है संकट?
केरल का लीगल मेट्रोलॉजी विभाग, सिविल सप्लाइज और फूड सेफ्टी टीमों के साथ मिलकर मॉल के सिनेमाघरों की जांच कर रहा है। असल में मल्टीप्लेक्स कंपनियों के लिए F&B (फूड एंड बेवरेज) बिजनेस कमाई का सबसे बड़ा जरिया है। फिल्मों के बॉक्स ऑफिस पर उतार-चढ़ाव के बीच, पॉपकॉर्न और कोल्ड ड्रिंक्स जैसे स्नैक्स से मिलने वाला हाई मार्जिन ही उनकी कमाई को सहारा देता है। वहीं, पीक आवर्स में 'डायनेमिक प्राइसिंग' के जरिए टिकट के दाम बढ़ाना भी कंपनियों के लिए रेवेन्यू बढ़ाने का एक मुख्य तरीका है।
सरकारी मंशा और कानूनी पेंच
फिलहाल अधिकारी मेन्यू कार्ड के दाम, पोर्शन साइज और कंज्यूमर राइट्स की जांच कर रहे हैं। लेकिन सरकार की नजर टिकट प्राइसिंग के लिए एक सख्त रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करने पर भी है। केरल हाई कोर्ट में दायर विभिन्न याचिकाओं के बाद सरकार इस दिशा में गंभीर दिख रही है। हालांकि, खुले और ताजा तैयार खाने की कीमतों को नियंत्रित करना सरकार के लिए कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि पहले भी बोतलबंद पानी जैसी चीजों पर नियम बनाने के दौरान उसे अदालती रुकावटों का सामना करना पड़ा है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
अगर सरकार इन जांचों के बाद खाने-पीने की चीजों या टिकट की कीमतों पर कोई कैप (Price Cap) लगाती है, तो इसका सीधा असर कंपनियों के ऑपरेटिंग प्रॉफिट पर पड़ेगा। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि सरकार के अगले आदेश क्या होते हैं और कोर्ट का रुख क्या रहता है। यदि रेगुलेटरी सख्ती बढ़ती है, तो सिनेमा ऑपरेटर्स को अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
