Kent RO: नल के पानी में माइक्रोप्लास्टिक्स का खतरा! महेश गुप्ता ने चेताया, घर-घर फिल्टर्स की मांग रहेगी बरकरार

CONSUMER-PRODUCTS
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Kent RO: नल के पानी में माइक्रोप्लास्टिक्स का खतरा! महेश गुप्ता ने चेताया, घर-घर फिल्टर्स की मांग रहेगी बरकरार

Kent RO के फाउंडर महेश गुप्ता ने नल के पानी की शुद्धता पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर के बावजूद पानी में माइक्रोप्लास्टिक्स और प्रदूषण की समस्या बरकरार है, जिससे वॉटर प्यूरीफायर की मांग बनी रहेगी।

पानी की शुद्धता पर बड़ा सवाल

Ideas for India Summit 2026 में बोलते हुए, Kent RO के फाउंडर महेश गुप्ता ने सरकार के 'हर घर जल' मिशन और घरों तक पहुँचने वाले पानी की असल क्वालिटी के बीच के अंतर को उजागर किया। उनका मानना है कि नल तक पानी तो पहुँच रहा है, लेकिन उसकी सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है।

क्यों बढ़ेगी प्यूरीफायर्स की मांग?

गुप्ता ने खास तौर पर माइक्रोप्लास्टिक्स (Microplastics) और इंडस्ट्रियल रन-ऑफ के बढ़ते खतरों की ओर इशारा किया है। वर्तमान सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर इन आधुनिक प्रदूषकों को हटाने में पूरी तरह सक्षम नहीं है। इस स्थिति से Hindustan Unilever (Pureit), Eureka Forbes और Havells जैसी कंपनियों को फायदा मिल सकता है, क्योंकि घर-घर में पानी को शुद्ध करना एक जरूरत बन गया है।

मुनाफे और चुनौती का संतुलन

सेक्टर के सामने सबसे बड़ी चुनौती 'अफोर्डेबिलिटी' है। आज भी एंट्री-लेवल प्यूरीफायर्स की कीमत ₹1,400 के आसपास है, जिसे हर वर्ग के लिए खरीदना आसान नहीं है। इसके अलावा, गिरता भूजल स्तर (Groundwater depletion) पानी में खनिजों की अधिकता और प्रदूषण को और बढ़ा रहा है।

निवेशकों के लिए नजर रखने वाली बात यह है कि ये कंपनियां कैसे बढ़ती लागत के बीच अपने मार्जिन को बरकरार रखती हैं और माइक्रोप्लास्टिक्स जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक में कितना इनोवेशन करती हैं। फिलहाल, मिडिल और हाई-इनकम घरों के लिए वॉटर प्यूरीफायर एक अनिवार्य वस्तु बना हुआ है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.