कर्नाटक में लागू नई 'Alcohol-in-Beverage' (AIB) टैक्स प्रणाली ने शराब बाजार की तस्वीर बदल दी है। मई 2026 से प्रभावी इस बदलाव के बाद, चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही में बीयर की बिक्री में **41.3%** का बड़ा उछाल आया है।
कर्नाटक सरकार द्वारा लागू किए गए नए टैक्सेशन मॉडल ने राज्य के बेवरेज मार्केट में हलचल मचा दी है। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच, बीयर की बिक्री में 41.32% का भारी उछाल देखा गया है। यह बदलाव 11 मई, 2026 को लागू हुई AIB प्रणाली के बाद आया है, जिसने पुरानी स्लैब-आधारित व्यवस्था को पूरी तरह से रिप्लेस कर दिया है।
राजस्व का नया गणित
नया ढांचा अब शराब पर फिक्स्ड स्लैब के बजाय उसमें मौजूद वास्तविक अल्कोहल कंटेंट (alcohol content) के आधार पर टैक्स लगाता है। राज्य सरकार के लिए यह कदम बेहद फायदेमंद साबित हुआ है। पहली छमाही में कुल एक्साइज रेवेन्यू ₹22,191.63 करोड़ तक पहुंच गया है, जो कि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 13.39% ज्यादा है।
IML का दबदबा बरकरार
जहाँ बीयर की बिक्री में जबरदस्त तेजी आई, वहीं इंडियन-मेड लिकर (IML) यानी व्हिस्की, वोदका और रम जैसे स्पिरिट्स की बिक्री में केवल 1.14% की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। बावजूद इसके, सरकारी खजाने में सबसे बड़ा योगदान IML का ही है, जिसने इस अवधि में ₹17,424.57 करोड़ का रेवेन्यू जेनरेट किया है।
निवेशकों के लिए क्या है आगे?
कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण माहौल बन गया है क्योंकि उन्हें अपनी प्रोडक्ट स्ट्रेटेजी को इस नए टैक्स स्ट्रक्चर के साथ अलाइन करना होगा। सरकार ने पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹45,000 करोड़ का राजस्व लक्ष्य रखा है। आगे चलकर यदि सरकार को लगता है कि AIB मॉडल रेवेन्यू लक्ष्यों को पूरा नहीं कर रहा है, तो दरों में बदलाव (recalibration) की संभावना बनी रहेगी। इसके अलावा, पब्लिक हेल्थ से जुड़े नियमों पर भी नजर रखना जरूरी होगा, जो आने वाले समय में शराब उद्योग पर असर डाल सकते हैं।
