कर्नाटक में नई एक्साइज ड्यूटी लागू होने के बाद बियर की मांग में जोरदार तेजी देखी गई है। फाइनेंशियल ईयर **2026-27** की पहली छमाही में बियर की बिक्री **275.96 लाख** केस तक पहुंच गई है, जो पिछले साल के मुकाबले **41.32%** ज्यादा है।
बाजार में आया बड़ा बदलाव
कर्नाटक सरकार द्वारा 11 मई, 2026 से लागू की गई 'अल्कोहल-इन-बेवरेज' आधारित नई एक्साइज ड्यूटी का असर अब साफ दिखने लगा है। राज्य में उपभोक्ता अब फिक्स्ड प्राइस स्लैब के बजाय अल्कोहल कंटेंट के हिसाब से शराब खरीद रहे हैं, जिसके चलते बियर की बिक्री में 41.32% की ऐतिहासिक बढ़त दर्ज की गई है।
रेवेन्यू और सेल्स पर असर
जहाँ एक तरफ बियर की डिमांड रॉकेट की तरह बढ़ी है, वहीं पारंपरिक इंडियन-मेड लिकर (IML) सेगमेंट की वॉल्यूम ग्रोथ महज 1.14% रही। हालांकि, इन बदलावों के बावजूद राज्य का कुल एक्साइज रेवेन्यू साल-दर-साल 13.39% बढ़कर ₹22,191.63 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है। सरकार ने इस फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹45,000 करोड़ का लक्ष्य रखा है।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
United Breweries, United Spirits, और Radico Khaitan जैसी कंपनियों के लिए यह नीति एक बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकती है। पहले की सख्त प्राइसिंग पॉलिसी की तुलना में, नई व्यवस्था कंपनियों को बेहतर फ्लेक्सिबिलिटी दे सकती है। हालांकि, निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या टैक्स के बढ़ते बोझ के बावजूद कंपनियां अपने मुनाफे के मार्जिन को बचाए रख पाएंगी या यह बढ़ती महंगाई कंज्यूमर डिमांड को प्रभावित करेगी।
भविष्य की चुनौतियां
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस सेक्टर में नीतिगत बदलावों का जोखिम हमेशा बना रहता है। पड़ोसी राज्यों के साथ कीमतों में भारी अंतर होने पर अवैध तस्करी (smuggling) का खतरा भी बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि क्या यह वॉल्यूम ग्रोथ आगे भी बरकरार रहती है या टैक्स का दबाव भविष्य में कंपनियों की कमाई को चोट पहुंचाएगा।
