Kansai Nerolac के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। कंपनी ने जून तिमाही में पिछले 3 सालों की सबसे बेहतरीन रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, जो **9.8%** बढ़कर **₹2,374 करोड़** हो गई। हालांकि, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के चलते कंपनी के मुनाफे पर थोड़ा दबाव है, जो **5%** बढ़कर **₹232 करोड़** रहा। भविष्य की डिमांड को देखते हुए, कंपनी ने FY29 तक अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स को बढ़ाने के लिए **₹601 करोड़** के विस्तार योजना का ऐलान किया है।
12 तिमाहियों में सबसे तगड़ी रेवेन्यू ग्रोथ!
Kansai Nerolac ने जून 30, 2026 को समाप्त तिमाही के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ पिछले 12 तिमाहियों में सबसे ज़्यादा रही, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 9.8% बढ़कर करीब ₹2,374 करोड़ पर पहुंच गई। यह मजबूती पेंट सेगमेंट और ऑटोमोटिव सेक्टर में औद्योगिक कोटिंग्स के मजबूत बिज़नेस की वजह से आई है।
मुनाफे पर थोड़ी चिंता, पर प्लान है बड़ा!
बिक्री बढ़ने के बावजूद, कंपनी का नेट प्रॉफिट 5% की धीमी रफ्तार से बढ़कर ₹232 करोड़ रहा। इसकी मुख्य वजह कच्चे माल की बढ़ती कीमतें हैं, जो सीधे तौर पर क्रूड ऑयल की कीमतों से जुड़ी हैं। कंपनी ने डेकोरेटिव पेंट्स में 3% और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स में 3-5% तक की कीमतें बढ़ाई हैं, लेकिन ये भी इनपुट कॉस्ट के बढ़े हुए बोझ को पूरी तरह से कम नहीं कर पाई हैं। इस वजह से कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन में थोड़ी कमी आई है, जो फिलहाल 13.9% से 14.6% के बीच हैं। कंपनी का लक्ष्य पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए इन मार्जिन को 13-14% की रेंज में बनाए रखना है।
भविष्य के लिए ₹601 करोड़ का निवेश
लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को ध्यान में रखते हुए, Kansai Nerolac ने ₹601 करोड़ के बड़े कैपिटल स्पेंडिंग प्रोग्राम को मंजूरी दी है। इस फंड का इस्तेमाल सायखा, ब kıl और होसुर में मौजूद अपने प्लांट्स की प्रोडक्शन कैपेसिटी को बढ़ाने में किया जाएगा। इन प्रोजेक्ट्स के 2028-29 फाइनेंशियल ईयर तक पूरे होने की उम्मीद है। यह बड़ा निवेश कंपनी की मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की मंशा को दिखाता है, खासकर ऐसे समय में जब कंपनी Asian Paints जैसे बड़े खिलाड़ियों के बीच अपनी पोजीशन मजबूत कर रही है।
आगे क्या?
निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में यह देखना होगा कि कंपनी कच्चे माल की बढ़ती लागत को ग्राहकों पर कितना प्रभावी ढंग से डाल पाती है। डिमांड तो अच्छी दिख रही है, लेकिन क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और करेंसी में कमजोरी जैसे रिस्क कंपनी के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर असर डाल सकते हैं। Shareholders के लिए यह भी देखना अहम होगा कि कंपनी अपनी कैपेसिटी एक्सपेंशन योजना को समय पर कैसे पूरा करती है, और क्या इस पर कंपनी का कर्ज बढ़ता है या नहीं।
