Kansai Nerolac Paints ने जून तिमाही में **5%** की बढ़त के साथ **₹231.5 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। डेकोरेटिव और इंडस्ट्रियल सेगमेंट में लगातार डिमांड बने रहने से कंपनी को यह मजबूती मिली है। भविष्य की ऑटोमोटिव डिमांड को भुनाने के लिए, कंपनी ने **₹601 करोड़** की क्षमता विस्तार योजना को भी मंजूरी दी है, जो **FY29** तक पूरी हो जाएगी।
कैसा रहा कंपनी का प्रदर्शन?
Kansai Nerolac Paints ने वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में ₹231.5 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 4.9% अधिक है। कंपनी के रेवेन्यू में 9.8% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹2,374 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस भी स्थिर रही, EBITDA ₹328.3 करोड़ रहा, जो 14% मार्जिन दर्शाता है। कंपनी ने इनपुट कॉस्ट की चुनौतियों के बावजूद यह नतीजे पेश किए हैं।
डिमांड और लागत का गणित
मैनेजमेंट के मुताबिक, डेकोरेटिव और इंडस्ट्रियल दोनों सेगमेंट में डिमांड मजबूत बनी हुई है। ऑटोमोटिव कोटिंग्स बिजनेस ने खास रणनीतिक प्रयासों से मार्केट के सामान्य ट्रेंड से बेहतर प्रदर्शन किया। परफॉरमेंस कोटिंग्स ने भी रेवेन्यू ग्रोथ में योगदान दिया। मानसून में देरी का असर भी सेल्स पर पॉजिटिव रहा। कंपनी को आने वाले त्योहारी सीजन, खासकर दिवाली के बाद सेल्स बढ़ने की उम्मीद है।
कच्चे माल की कीमतों का दबाव
मांग स्थिर होने के बावजूद, कंपनी को बाहरी वजहों से मार्जिन पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिम एशिया में जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे मार्च से कच्चे माल की कीमतें बढ़ गई हैं। इसके अलावा, रुपये के कमजोर होने से इंपोर्टेड रॉ मैटेरियल की लागत भी बढ़ गई है। अपने मार्जिन को बचाने के लिए, कंपनी ने अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी करना शुरू कर दिया है। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या ये प्राइस हाइक्स मार्केट में स्वीकार किए जाते हैं या वॉल्यूम पर असर डालते हैं।
भविष्य के लिए बड़ी योजना
कंपनी के बोर्ड ने ₹601 करोड़ की एक बड़ी कैपिटल स्पेंडिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इसका मकसद Sayakha, Bawal और Hosur स्थित प्लांट्स में मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ाना है। यह विस्तार इंडस्ट्रियल पेंट्स, पाउडर कोटिंग्स और रेजिन के उत्पादन को बढ़ाने पर केंद्रित है। Sayakha प्लांट में इंडस्ट्रियल पेंट कैपेसिटी 1,750 किलोलीटर प्रति माह बढ़ाई जाएगी, साथ ही पाउडर कोटिंग्स और रेजिन की नई कैपेसिटी भी जोड़ी जाएगी।
यह प्रोजेक्ट FY29 तक फेज में पूरा होगा। कंपनी इन विस्तारों को पूरी तरह से अपने इंटरनल कैश फ्लो से फंड करने की योजना बना रही है। इंटरनल कैश का उपयोग करने से नए कर्ज का बोझ तो नहीं बढ़ेगा, लेकिन शेयरधारकों को अगले कुछ सालों में कंपनी द्वारा किए जाने वाले इस बड़े निवेश से लिक्विडिटी या डिविडेंड पर पड़ने वाले असर पर नजर रखनी चाहिए। इस रणनीति की सफलता कंपनी की ऑटोमोटिव सेक्टर में लगातार डिमांड बनाए रखने और ग्लोबल प्राइस वोलेटिलिटी के बीच लागत नियंत्रण उपायों की प्रभावशीलता पर निर्भर करेगी।
