Jyothy Labs के पास करीब ₹1,000 करोड़ की कैश राशि और जीरो डेट (Debt) होने के बावजूद कंपनी अब अधिग्रहण के बजाय अपने ब्रांड्स को बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। Henkel के साथ लाइसेंस डील खत्म होने के बाद कंपनी के मुनाफे पर दबाव बढ़ा है।
बिजनेस में बड़ा बदलाव
Jyothy Labs फिलहाल एक बड़े बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन से गुजर रही है। कंपनी का बैलेंस शीट बेहद मजबूत है, जिसमें कोई कर्ज नहीं है और करीब ₹997 करोड़ की नकदी मौजूद है। इसके बावजूद, मैनेजमेंट ने साफ कर दिया है कि वे अभी किसी और कंपनी को खरीदने (Acquisition) के मूड में नहीं हैं। कंपनी का सारा फोकस अब अपने खुद के ब्रांड्स, जैसे कि Exo, को स्केल करने पर है, ताकि पुराने लाइसेंस वाले प्रोडक्ट्स से हुई कमी को पूरा किया जा सके।
Henkel डील का असर
यह बदलाव 31 मई, 2026 को जर्मनी की Henkel AG के साथ हुई लाइसेंसिंग डील खत्म होने के बाद आया है। Pril और Fa जैसे ब्रांड्स कंपनी के रेवेन्यू और मुनाफे का बड़ा हिस्सा थे। इस साझेदारी के खत्म होने का असर नतीजों पर साफ दिख रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 50.8% गिरकर ₹47.6 करोड़ पर आ गया है। वहीं, EBITDA मार्जिन भी सिमटकर 8.4% रह गया है।
बढ़ती चुनौतियां और प्रतिस्पर्धा
कंपनी की मुश्किलें सिर्फ लाइसेंसिंग डील तक सीमित नहीं हैं। कंपनी का करीब 85% प्रोडक्ट पोर्टफोलियो क्रूड ऑयल (Crude Oil) से जुड़ा है, जिससे कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर मुनाफे पर पड़ता है। साथ ही, Hindustan Unilever और Godrej Consumer Products जैसे बड़े खिलाड़ियों से मिल रही कड़ी टक्कर ने भी माहौल चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
फिलहाल, कंपनी अपनी नकदी का इस्तेमाल एक 'बफर' के रूप में कर रही है ताकि बाजार की अस्थिरता का सामना किया जा सके। निवेशकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या कंपनी अपने कोर ब्रांड्स जैसे डिशवॉश और इंसेक्ट कंट्रोल सेगमेंट में वॉल्यूम ग्रोथ हासिल कर पाएगी और मार्जिन को दोबारा पटरी पर ला सकेगी या नहीं।
