Jubilant Foodworks Share Price: नतीजों के बाद 2% फिसले शेयर, मार्जिन पर निवेशकों की चिंता

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AuthorMehul Desai|Published at:
Jubilant Foodworks Share Price: नतीजों के बाद 2% फिसले शेयर, मार्जिन पर निवेशकों की चिंता

Jubilant Foodworks के शेयरों में आज **2%** से ज़्यादा की गिरावट देखी गई। कंपनी ने पहली तिमाही में **14.1%** रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की, लेकिन मार्जिन पर दबाव और उम्मीद से कम सेल्स ग्रोथ को लेकर निवेशकों में चिंता है।

Jubilant Foodworks के शेयर क्यों गिरे?

मंगलवार को Jubilant Foodworks, जो भारत में Domino's Pizza चेन चलाती है, के शेयर 2.05% गिरकर ₹501.00 पर आ गए। यह गिरावट कंपनी के 2027 फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही के नतीजों के बाद आई है। निवेशकों ने जहां एक तरफ कंपनी के रेवेन्यू ग्रोथ पर ध्यान दिया, वहीं दूसरी तरफ बढ़ते ऑपरेशनल खर्चों और मार्जिन पर दबाव को लेकर चिंता जताई है।

नतीजों पर एक नज़र

कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया है कि जून 2026 को खत्म हुई तिमाही में उसका कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 14.1% बढ़कर ₹2,569.65 करोड़ हो गया। हालांकि, नेट प्रॉफिट में बढ़ोतरी थोड़ी कम, यानी 6.04% बढ़कर ₹100.03 करोड़ रही। रेवेन्यू और प्रॉफिट के बीच का यह अंतर बताता है कि कंपनी को लगातार बढ़ती महंगाई और अन्य ऑपरेशनल खर्चों के कारण अपने प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखने में दिक्कत आ रही है।

सेल्स ग्रोथ और मार्जिन पर दबाव

Domino's India की 'लाइक-फॉर-लाइक' (LFL) सेल्स ग्रोथ इस तिमाही में 2.5% रही, जो कंपनी के 5-7% के मीडियम-टर्म टारगेट से कम है। इसका मतलब है कि कंपनी नए स्टोर खोलकर अपना बिज़नेस तो बढ़ा रही है, लेकिन मौजूदा स्टोर्स पर बिक्री उतनी तेजी से नहीं बढ़ रही जितनी उम्मीद की जा रही थी। कंपनी का EBITDA मार्जिन 19.6% से 19.77% के बीच रहा, जिस पर LPG और अन्य ऑपरेशनल खर्चों का असर साफ दिख रहा है।

नेतृत्व में बदलाव और डिविडेंड

फाइनेंशियल नतीजों के अलावा, कंपनी के नेतृत्व में भी कुछ बदलाव हुए हैं। 13 अगस्त, 2026 को, Jubilant Foodworks ने अपने कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर, मोना अग्रवाल के इस्तीफे की घोषणा की थी। इसके साथ ही, कंपनी ने 2026 फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹1.20 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड भी घोषित किया है, जो शेयरधारकों के लिए अच्छी खबर है। कंपनी Popeyes जैसे नए ब्रांड्स के विस्तार में भी निवेश कर रही है, जो उसके लिए एक लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजिक फोकस है।

आगे क्या?

निवेशकों को अब यह देखना होगा कि कंपनी कैसे अपने इनपुट कॉस्ट को मैनेज करती है और आने वाली तिमाहियों में मौजूदा स्टोर्स की बिक्री परफॉर्मेंस को कैसे बेहतर बनाती है। सबसे बड़ी चुनौती स्टोर विस्तार को प्रॉफिटेबल ग्रोथ के साथ संतुलित करना है, खासकर बढ़ते इनपुट कॉस्ट और अस्थिर टैक्स रेट्स के माहौल में। नए ब्रांड Popeyes की प्रगति और स्टोर-लेवल प्रोडक्टिविटी पर भविष्य के अपडेट्स कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी के महत्वपूर्ण संकेतक होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.