Jubilant FoodWorks ने जून 2026 तिमाही के लिए **14.1%** की कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, जिसका मुख्य कारण आक्रामक स्टोर एक्सपेंशन रहा। हालांकि, कंपनी के Domino's इंडिया ब्रांड में सेल्स ग्रोथ मामूली रही, क्योंकि कंपनी रेस्टोरेंट सेक्टर में कॉम्पिटिटिव प्रेशर को मैनेज कर रही है।
Jubilant FoodWorks के नतीजे
Jubilant FoodWorks Limited, जो भारत में Domino’s Pizza की ऑपरेटर है, ने 30 जून, 2026 को समाप्त हुई तिमाही के लिए अपने फाइनेंशियल नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ₹2,569.3 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 14.1% ज्यादा है। वहीं, स्टैंडअलोन बेस पर रेवेन्यू 9.2% बढ़कर ₹1,848.5 करोड़ तक पहुंच गया।
स्टोर एक्सपेंशन पर ज़ोर
कंपनी की मौजूदा स्ट्रेटेजी का एक अहम हिस्सा तेजी से फिजिकल एक्सपेंशन करना है। जून तिमाही के दौरान, कंपनी ने अपने विभिन्न ब्रांड्स और बाजारों में कुल 76 नए आउटलेट खोले, जिससे कुल स्टोर्स की संख्या बढ़कर 3,712 हो गई। इसमें सबसे बड़ा योगदान Domino's India का रहा, जिसने 58 नए आउटलेट जोड़े और अब उसके 2,513 स्टोर हो गए हैं। कंपनी के इंटरनेशनल सेगमेंट, Domino's Eurasia ने भी 8 नए स्टोर जोड़कर कुल 795 स्टोर का आंकड़ा छुआ।
सेल्स ग्रोथ की स्थिति
टॉपलाइन ग्रोथ तो मजबूत बनी हुई है, लेकिन कंपनी अपने मुख्य ब्रांड के लिए धीमी सेल्स ग्रोथ से जूझ रही है। Domino's India ने तिमाही के दौरान 2.5% की लाइक-फॉर-लाइक सेल्स ग्रोथ दर्ज की। यह वह मीट्रिक है जो स्थापित स्टोर्स की सेल्स ग्रोथ को मापती है और जिससे अंडरलाइंग कंज्यूमर डिमांड का पता चलता है। पिछली तिमाहियों में, कंपनी ने बताया था कि सप्लाई चेन की दिक्कतें, जैसे कि कमर्शियल एलपीजी की उपलब्धता, उसके कई स्टोर्स के ऑपरेशन को प्रभावित कर रही थीं। इसके अलावा, भारतीय पिज्जा सेगमेंट में कॉम्पिटिशन कम हो रहा है, लेकिन कंपनी को अभी भी प्राइस-सेंसिटिव कंज्यूमर्स का सामना करना पड़ रहा है।
फाइनेंशियल परफॉरमेंस का ओवरव्यू
पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY26) की चौथी तिमाही की बात करें तो, कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 14% घटकर ₹42.5 करोड़ पर आ गया था। प्रॉफिट में गिरावट के बावजूद, ऑपरेटिंग एफिशिएंसी में सुधार के संकेत मिले। EBITDA (इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) 11.5% बढ़कर ₹344.7 करोड़ हो गया। नतीजतन, EBITDA मार्जिन बढ़कर 20.5% हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 19.6% था। यह दिखाता है कि सेल्स ग्रोथ की चुनौतियों के बावजूद कंपनी लागत प्रबंधन में बेहतर हुई है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
आगे चलकर, निवेशक इस बात पर नज़र रखेंगे कि कंपनी अपने आक्रामक स्टोर नेटवर्क एक्सपेंशन को हाई सेल्स ग्रोथ में बदल पाती है या नहीं। साथ ही, रॉ मटेरियल और एनर्जी की कीमतों में उतार-चढ़ाव को मैनेज करते हुए प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखना या सुधारना भविष्य की कमाई के लिए महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा, इंटरनेशनल ऑपरेशंस का परफॉरमेंस और भारत में कॉम्पिटिटिव माहौल को नेविगेट करने की कंपनी की क्षमता भी मूल्यांकन के अहम बिंदु बने रहेंगे।
