John Distilleries के फाउंडर Paul John अब कंपनी में **10-20%** की हिस्सेदारी बरकरार रखने के लिए बातचीत कर रहे हैं। वहीं, अमेरिकी दिग्गज Sazerac ने अपना नियंत्रण बढ़ाकर **65.7%** कर लिया है।
ओनरशिप में बड़ा बदलाव
भारतीय स्पिरिट्स मार्केट की दिग्गज कंपनी John Distilleries में ओनरशिप का बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कंपनी के फाउंडर Paul John अब अपनी हिस्सेदारी घटाकर 10% से 20% के बीच रखने की योजना बना रहे हैं, जिसके बाद अमेरिकी स्पिरिट्स कंपनी Sazerac कंपनी की बागडोर पूरी तरह अपने हाथ में ले लेगी। इस बदलाव के बाद Paul John एक एडवाइजरी भूमिका में नजर आ सकते हैं ताकि घरेलू कामकाज में कोई बाधा न आए।
Sazerac की बढ़ती पकड़
Sazerac ने धीरे-धीरे कंपनी में अपनी हिस्सेदारी को आक्रामक रूप से बढ़ाया है। पिछले साल यह हिस्सेदारी 34.4% थी, जो अब बढ़कर 65.7% हो गई है। कंपनी की मौजूदा वैल्यूएशन करीब ₹4,500 करोड़ आंकी गई है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस
FY26 के आंकड़े उत्साहजनक रहे हैं। कंपनी का रेवेन्यू 15.1% बढ़कर ₹10,820 करोड़ पर पहुंच गया है। वहीं, नेट प्रॉफिट में भी उछाल आया है, जो FY25 के ₹1.8 करोड़ से बढ़कर ₹11.6 करोड़ हो गया है। हालांकि, यह मुनाफा टैक्स क्रेडिट्स की मदद से बढ़ा है, जबकि असल बिजनेस पर भारी रेगुलेटरी दबाव है।
प्रोडक्शन और सरकारी नीतियों की चुनौती
कंपनी के सामने सबसे बड़ी बाधा सिंगल माल्ट व्हिस्की की 'मैचुरेशन साइकिल' है। कंपनी अपनी 12 मिलियन लीटर की इंस्टॉल क्षमता के मुकाबले 10.3 मिलियन लीटर का प्रोडक्शन कर रही है, लेकिन मैचुरेशन के चलते प्रोडक्शन को रातों-रात बढ़ाना नामुमकिन है।
इसके अलावा, कर्नाटक जैसे राज्यों में बढ़ती एक्साइज ड्यूटी ने कंपनी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। टैक्स बढ़ने से रिटेल कीमतें बढ़ानी पड़ती हैं, जिससे डिमांड पर असर पड़ रहा है। मैनेजमेंट को डर है कि अगर टैक्स का यही हाल रहा, तो ग्राहक लीगल स्पिरिट्स से दूर होकर अवैध विकल्पों की ओर मुड़ सकते हैं।
