त्योहारी सीजन में सोने की कीमतें **₹1.5 लाख** के करीब पहुंच गई हैं, बावजूद इसके ज्वेलरी रिटेलर्स को **20-25%** रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद है। हालांकि, ऊंचे दामों के चलते वॉल्यूम में **10-15%** की गिरावट संभव है।
भारतीय ज्वेलरी सेक्टर इस वक्त रिकॉर्ड स्तर पर चल रही सोने की कीमतों के बीच भी फेस्टिव और वेडिंग सीजन को लेकर काफी आशान्वित है। 24K गोल्ड की कीमतें ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू रही हैं। इंडस्ट्री में अब सेल्स वैल्यू और असल बिक्री की मात्रा (ग्रामेज) के बीच बड़ा अंतर दिख रहा है। रिटेलर्स रेवेन्यू में 20-25% की ग्रोथ देख रहे हैं, लेकिन बिक्री की मात्रा में 10-15% की गिरावट का अनुमान है।\n\n### वॉल्यूम बचाने के लिए बदली रणनीति\n\nइस चुनौतीपूर्ण दौर में कंपनियां अपनी रणनीति बदल रही हैं। ग्राहक अब भारी-भरकम 22K गोल्ड की जगह 14K और 18K के हल्के और ट्रेंडी ज्वेलरी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। साथ ही, बड़ी रिटेल चेन पुराने सोने को एक्सचेंज करने के ऑफर पर जोर दे रही हैं, जिससे ग्राहकों की जेब पर तुरंत असर कम पड़े। डायमंड और स्टडेड ज्वेलरी पर भी फोकस बढ़ा है, जिससे मेकिंग चार्जेस के जरिए कंपनियां मार्जिन बचाने की कोशिश कर रही हैं।\n\n### निवेशकों के लिए चेतावनी और रिस्क\n\nज्वेलरी बिजनेस काफी कैपिटल-इंटेंसिव है, यानी ऊंची कीमतों पर स्टॉक रखने के लिए कंपनियों को ज्यादा वर्किंग कैपिटल की जरूरत पड़ रही है। अगर डिमांड लंबे समय तक धीमी रही, तो कंपनियों की इन्वेंट्री बढ़ सकती है, जिससे कर्ज का ब्याज बोझ बढ़ सकता है। इसके अलावा, ऊंचे मेकिंग चार्जेस के कारण ग्राहकों की प्राइस सेंसिटिविटी बढ़ गई है, जिससे ऑपरेटिंग मार्जिन पर भी दबाव बना हुआ है।\n\n### निवेशकों को क्या देखना चाहिए?\n\nआने वाले नतीजों में सेम-स्टोर सेल्स ग्रोथ और कंपनी का सेल्स मिक्स (गोल्ड बनाम डायमंड) देखना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, ब्याज दरों (इंटरेस्ट रेट) के ट्रेंड और गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी में होने वाले बदलावों पर भी नजर रखना निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होगा क्योंकि ये भविष्य की मुनाफे की रफ्तार तय करेंगे।
