भारत के सनस्क्रीन मार्केट में तूफानी तेजी देखी जा रही है। साल 2022 के **4.2 मिलियन** हाउसहोल्ड के मुकाबले अब यह संख्या बढ़कर **14.3 मिलियन** हो गई है। Hindustan Unilever और Honasa Consumer जैसी दिग्गज कंपनियां इस बदलते ट्रेंड को भुनाने में जुटी हैं।
भारतीय सनस्क्रीन मार्केट अब सिर्फ गर्मियों का सामान नहीं रहा, बल्कि यह साल भर इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीज बन चुका है। जून 2026 तक, सन प्रोटेक्शन प्रोडक्ट्स की पहुंच 14.3 मिलियन घरों तक पहुंच गई है, जो 2022 के मध्य के आंकड़ों की तुलना में 3 गुना ज्यादा है। यह 36% की सालाना ग्रोथ रेट दर्शाती है कि कैसे बदलते कंज्यूमर बिहेवियर के साथ यह कैटेगरी मेनस्ट्रीम बन रही है।
बाजार की बदली रणनीति
बड़ी FMCG कंपनियां और डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड्स इस डिमांड को पकड़ने के लिए अपनी रणनीति बदल रहे हैं। Hindustan Unilever ने अपने डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए Lakme, Simple और Minimalist जैसे ब्रांड्स के जरिए पोर्टफोलियो को मजबूत किया है। कंपनी छोटे पैक्स के जरिए इसे मध्यम वर्ग तक भी पहुंचा रही है।
वहीं, Mamaearth की पैरेंट कंपनी Honasa Consumer ने सन प्रोटेक्शन को अपनी ग्रोथ का मुख्य इंजन माना है। कंपनी का ब्रांड 'The Derma Co.' पहले ही इस कैटेगरी में ₹100 करोड़ के सालाना रेवेन्यू का आंकड़ा पार कर चुका है, और अब Mamaearth ब्रांड भी इसी राह पर है।
कॉम्पिटिशन और रिस्क
मार्केट में Shiseido और L'Oréal जैसे ग्लोबल दिग्गज भी प्रीमियम फॉर्मूलेशन के साथ कड़ी टक्कर दे रहे हैं। भारत के स्किनकेयर मार्केट में सनस्क्रीन का हिस्सा फिलहाल 6% है, जो अमेरिका या दक्षिण कोरिया के 11% के मुकाबले काफी कम है, जो भविष्य में बड़े विस्तार की गुंजाइश दिखाता है।
हालांकि, निवेशकों को कुछ जोखिमों पर नजर रखनी होगी। SPF क्लेम को लेकर रेगुलेटरी सख्ती बढ़ रही है, जिससे कंपनियों को टेस्टिंग और क्लीनिकल वैलिडेशन पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। साथ ही, डिजिटल ब्रांड्स के लिए कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट (CAC) मुनाफे पर दबाव डाल सकती है। फिलहाल ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी पैठ सिर्फ 2.4% है, जिस पर आने वाले समय में कंपनियों की नजर रहेगी।
