Indian Snacking Market: स्नैकिंग मार्केट में बड़ी क्रांति, साल 2034 तक **₹1 लाख करोड़** का आंकड़ा पार करने की तैयारी

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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Snacking Market: स्नैकिंग मार्केट में बड़ी क्रांति, साल 2034 तक **₹1 लाख करोड़** का आंकड़ा पार करने की तैयारी

भारत में खान-पान का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब लोग मुख्य भोजन की जगह स्नैक्स को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे यह इंडस्ट्री **₹1 लाख करोड़** के वैल्युएशन की ओर बढ़ रही है। इसमें क्विक-कॉमर्स और हेल्थ-फोकस्ड स्नैक्स का बड़ा योगदान है।

भारतीय फूड कंजम्पशन का पूरा ढांचा एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अब लोग दिन में तीन बार के पारंपरिक भोजन से हटकर स्नैक्स पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं। शहरी जीवन की भागदौड़ के चलते समय की कमी ने इस 'स्नैक-ड्रिवन इकोनॉमी' को बढ़ावा दिया है। 2023-24 के आंकड़ों पर नजर डालें तो अर्बन इलाकों में कुल मंथली खर्च का 11% हिस्सा बेवरेजेज और प्रोसेस्ड फूड्स पर खर्च हो रहा है, जो अनाज (cereals) की पारंपरिक खपत को पीछे छोड़ रहा है।\n\n### क्विक-कॉमर्स बना गेम-चेंजर\nइस ट्रेंड को पंख लगाने का काम Blinkit, Zepto और Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने किया है। इन प्लेटफॉर्म्स ने डिलीवरी के समय को इतना कम कर दिया है कि लोग अब अचानक होने वाली छोटी-छोटी खरीदारी (Impulse buying) को बढ़ावा दे रहे हैं। यह एक नया डिस्ट्रीब्यूशन चैनल बन गया है, जिस पर एफएमसीजी कंपनियां अपना पूरा फोकस कर रही हैं।\n\n### हेल्थ और प्रीमियम का तड़का\nआजकल के ग्राहक केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि पोषण (Functional nutrition) भी देख रहे हैं। 'क्लीन-लेबल' और प्रोटीन-रिच स्नैक्स की डिमांड बढ़ रही है। प्रीमियम प्राइसिंग के बावजूद इन प्रोडक्ट्स में कंपनियों के लिए बेहतर मार्जिन (Profit Margin) की संभावना है। हालांकि, यहां चुनौतियां भी कम नहीं हैं। एफएसएसएआई (FSSAI) जैसे फूड सेफ्टी अथॉरिटीज के सख्त नियम और लेबलिंग क्लैम के चलते कंपनियों को अब काफी सावधानी बरतनी होगी।\n\n### चुनौतियां और भविष्य की राह\nबाजार की इस तेजी के बीच कुछ जोखिम भी हैं। महंगाई और कच्चे माल की बढ़ती लागत के साथ-साथ मल्टीनेशनल कंपनियों और रीजनल प्लेयर्स के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा एक बड़ी चुनौती है। साथ ही, ग्रामीण इलाकों में मानसून का असर डिमांड पर सीधे पड़ता है। निवेशकों को आने वाले समय में कंपनियों की 'कॉस्ट मैनेजमेंट' और 'हेल्थी पोर्टफोलियो' को स्केल करने की क्षमता पर कड़ी नजर रखनी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.