भारत के शेपवियर की धूम: ब्रांड्स ग्रोथ की तलाश में, अहम फंडिंग हासिल

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AuthorNeha Patil|Published at:
भारत के शेपवियर की धूम: ब्रांड्स ग्रोथ की तलाश में, अहम फंडिंग हासिल
Overview

भारत का परिधान (apparel) क्षेत्र एक महत्वपूर्ण बदलाव देख रहा है, क्योंकि शेपवियर कभी-कभी पहने जाने वाले कपड़ों से हटकर अलमारी का एक ज़रूरी हिस्सा बन गया है। आरामदायक, बॉडी-पॉजिटिव इनरवियर की मांग और क्विक-कॉमर्स व सोशल मीडिया से मिली बढ़ावा से प्रेरित होकर, रिलायंस रिटेल से लेकर स्टार्टअप्स तक, ब्रांड्स भारी निवेश कर रहे हैं। यह बाज़ार, जिसके 2032 तक 220.8 मिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, कंपनियों द्वारा इस विशिष्ट (niche), स्केलेबल ग्रोथ कैटेगरी का पीछा करने के कारण महत्वपूर्ण फंडिंग आकर्षित कर रहा है।

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शेपवियर का उदय: भारत का परिधान बाज़ार एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण परिवर्तन से गुज़र रहा है, क्योंकि शेपवियर एक कार्यात्मक (functional) अलमारी के आवश्यक वस्तु के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। उपभोक्ता तेजी से ऐसे इनरवियर की तलाश कर रहे हैं जो समर्थन (support) और आत्मविश्वास दोनों प्रदान करे, जिससे मौसमी फैशन रुझानों से परे मांग बढ़ रही है। क्विक-कॉमर्स प्लेटफार्मों के माध्यम से आसान पहुंच और सोशल मीडिया पर बढ़ी हुई दृश्यता (visibility) खरीदारी की आदतों को नया आकार दे रही है, जिससे शेपवियर कभी-कभी खरीदने वाली चीज़ से युवा जनसांख्यिकी (demographics) के लिए एक मुख्य आधार बन रहा है। यह लगातार, हर मौसम की मांग स्थापित खुदरा दिग्गजों (retail giants) और उभरते स्टार्टअप्स दोनों को अपने शेपवियर प्रस्तावों का विस्तार करने के लिए मजबूर कर रही है। रिलायंस रिटेल, क्लोविया (Clovia) और ज़ीमे (Zivame) जैसे ब्रांडों के स्वामित्व के साथ, साथ ही नए प्रवेशकों (entrants) के साथ, युवा उपभोक्ताओं को आकर्षित करने और राजस्व धाराओं (revenue streams) में विविधता लाने के लिए शेपवियर को प्राथमिकता दे रहा है। शेपिंग टैंक्स, कंट्रोल पैंटीज़ और वेस्ट ट्रेनर्स जैसे आइटम्स की बढ़ती लोकप्रियता इस कैटेगरी के उदय का एक स्पष्ट संकेत है।

फंडिंग से विस्तार: बढ़ता हुआ शेपवियर बाज़ार न केवल उपभोक्ताओं को बल्कि निवेशकों को भी आकर्षित कर रहा है। दिसंबर में, कंटेंट क्रिएटर कुशा कपिला (Kusha Kapila) द्वारा स्थापित शेपवियर स्टार्टअप अंडरनीट (Underneat) ने फायरसाइड वेंचर्स (Fireside Ventures) के नेतृत्व में 6 मिलियन डॉलर की प्री-सीरीज़ ए फंडिंग हासिल की। नोएडा स्थित क्रवी (Krvvy) कथित तौर पर अपने मौजूदा निवेशकों, ऑल इन कैपिटल (All In Capital) और टाइटन कैपिटल (Titan Capital) से फॉलो-ऑन कैपिटल (follow-on capital) बंद कर रहा है, जिसने प्री-सीड फंडिंग में 6.1 करोड़ रुपये जुटाए थे। 2023 में माधव सक्सेना (Madhav Saxena) द्वारा स्थापित दिल्ली-आधारित ब्रांड इन्वोग (Invogue) ने भी कैपिटल जुटाया है, जिसकी घोषणा लंबित है। सक्सेना ने भारत में आरामदायक, आकर्षक और आत्मविश्वास बढ़ाने वाले शेपवियर की कमी को देखकर, विशेष रूप से महामारी के बाद वजन में उतार-चढ़ाव के दौरान, इन्वोग की स्थापना की। उन्होंने स्किम्स (Skims) जैसे वैश्विक ब्रांडों के साथ एक बड़ा अंतर देखा, जिसने इनरवियर डिजाइन में बॉडी पॉजिटिविटी और समावेशिता (inclusivity) के आसपास भारत की धीमी बातचीत को उजागर किया। ब्रांड अब ऐसे उत्पाद पेश करने पर काम कर रहे हैं जो विविध भारतीय शरीर के प्रकारों, जलवायु और जीवन शैलियों को बेहतर ढंग से पूरा करते हैं।

बाजार अनुमान और वैश्विक समानताएं: एपोलो रिसर्च (Apollo Research) की मई 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शेपवियर बाज़ार का मूल्य 2022 में 49.6 मिलियन डॉलर था और इसके 2032 तक 220.8 मिलियन डॉलर तक बढ़ने का अनुमान है, जो 16.16% की मजबूत चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) प्रदर्शित करता है। यह विकास गति किम कार्दशियन (Kim Kardashian) के स्किम्स (Skims) और स्पैंक्स (Spanx) जैसे वैश्विक ब्रांडों की सफलता को दर्शाती है, जिन्होंने सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट (celebrity endorsement), समावेशी साइज़िंग (inclusive sizing) और सोशल-फर्स्ट रणनीतियों (social-first strategies) के माध्यम से शेपवियर को एक मुख्यधारा, निवेशक-समर्थित परिधान खंड में बदल दिया है। क्लोविया (Clovia) जैसी कंपनियां सटीक साइज़िंग और कम्प्रेशन स्तरों पर ध्यान केंद्रित करके अपने पोर्टफोलियो को बढ़ा रही हैं, जबकि नायका फैशन (Nykaa Fashion) अपने लिनजरी ब्रांड, न्यक्ड (Nykd) के लिए विकास में तेजी ला रही है। यह मांग विशेष रूप से गैर-मेट्रो शहरों में मजबूत है, क्रवी (Krvvy) ने इन क्षेत्रों से लगभग आधा राजस्व रिपोर्ट किया है। क्विक-कॉमर्स प्लेटफार्मों ने भी तेजी से बिक्री की सुविधा प्रदान की है, जो उच्च-मात्रा वाले लेनदेन (high-volume transactions) के लिए इस कैटेगरी की क्षमता को प्रदर्शित करता है।

विकास की बाधाओं को नेविगेट करना: आशाजनक दृष्टिकोण (outlook) के बावजूद, संरचनात्मक चुनौतियां (structural challenges) बनी हुई हैं। परिधान क्षेत्र को बढ़ाना (scale) कुख्यात रूप से कठिन है, और भारत भर में विभिन्न शरीर के प्रकारों के लिए सूक्ष्म उत्पाद इंजीनियरिंग (nuanced product engineering) की आवश्यकता होती है। ऑनलाइन-फर्स्ट वितरण (online-first distribution) पर निर्भरता महंगा साइज़िंग त्रुटियों (sizing errors) के जोखिम प्रस्तुत करती है, और ऑफ़लाइन विस्तार के लिए कर्मचारी प्रशिक्षण (staff training) और इन्वेंटरी में (inventory) महत्वपूर्ण निवेश की आवश्यकता होती है। ये कारक दीर्घकालिक लाभप्रदता (long-term profitability) और मार्जिन प्रबंधन (margin management) पर सवाल उठाते हैं। ब्रांड सक्रिय रूप से शेपवियर को कलंकित (destigmatize) करने के लिए काम कर रहे हैं, इसे शरीर की छवि (body image) के मुद्दों से प्रेरित आवश्यकता के बजाय व्यक्तिगत शैली को बढ़ाने (accentuating personal style) के एक उपकरण के रूप में स्थापित कर रहे हैं। इन्वोग (Invogue) के संस्थापक, माधव सक्सेना (Madhav Saxena), इसकी तुलना 'शरीर के लिए मेकअप' (makeup for the body) से करते हैं। क्लोविया (Clovia) के सीईओ, पंकज वर्माणी (Pankaj Vermani), शेपवियर को सहज (intuitive) और रोजमर्रा का अनुभव कराने के लिए शिक्षा, परीक्षण (trial) और प्रतिक्रिया-आधारित डिज़ाइन (feedback-led design) की आवश्यकता पर जोर देते हैं।

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