भारत का क्विक-कॉमर्स मार्केट अब तेजी से विस्तार के बजाय 'यूनिट-लेवल प्रॉफिटेबिलिटी' पर जोर दे रहा है। Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसे खिलाड़ी अब अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी सुधारने में जुटे हैं, क्योंकि Amazon और Reliance जैसे दिग्गज कंपनियां भी इस रेस में कूद पड़ी हैं।
मुनाफे की ओर बड़ा कदम
भारत का क्विक-कॉमर्स सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अब कंपनियां 'ग्रोथ-एट-ऑल-कॉस्ट' (Growth-at-all-costs) की रणनीति को पीछे छोड़कर मुनाफे पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। इन्वेस्टर भी अब इस बात पर जोर दे रहे हैं कि कंपनियां कैश बर्न (Cash burn) कम करें और अपनी बॉटम लाइन (Bottom line) को सुधारें।
डार्क-स्टोर का गणित
10-मिनट डिलीवरी का वादा निभाने वाले डार्क-स्टोर (Dark-stores) अब कंपनियों के लिए बड़ा फिक्स्ड-कॉस्ट बोझ बन गए हैं। इसी को कंट्रोल करने के लिए Zepto ने अगस्त 2026 में अपना मिनिमम ऑर्डर वैल्यू बढ़ाकर ₹199 कर दिया है। अच्छी खबर यह है कि Blinkit जैसी कंपनियां अपनी एडजेस्टेड EBITDA प्रॉफिटेबिलिटी दिखा रही हैं, जो इस बात का सबूत है कि ऑपरेशनल बदलाव काम कर रहे हैं।
दिग्गज खिलाड़ियों से बढ़ी चुनौती
हालांकि, राह आसान नहीं है। Amazon, Reliance और Tata जैसी बड़ी कंपनियां अपने लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का फायदा उठाकर मार्केट शेयर छीनने की कोशिश में हैं। Amazon ने तो ₹2,800 करोड़ के निवेश और 1,000 से ज्यादा माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर्स के साथ 300 शहरों में अपने पैर पसारने का ऐलान कर दिया है।
आगे क्या होगा?
मार्केट एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि आने वाले समय में इन्फ्लेशन और कमजोर कंज्यूमर स्पेंडिंग जैसे बाहरी खतरे कंपनियों के लिए मुसीबत बन सकते हैं। इन कंपनियों के लिए असली परीक्षा यह होगी कि वे अपने सर्विस लेवल को बरकरार रखते हुए कैसे लगातार प्रॉफिट कमाती हैं।
