भारत में चीनी स्मार्टफोन ब्रांड्स पर गिरी 'गाज'! पहले बार रेवेन्यू में आई गिरावट, प्रीमियम सेगमेंट का बढ़ा दबदबा

CONSUMER-PRODUCTS
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
भारत में चीनी स्मार्टफोन ब्रांड्स पर गिरी 'गाज'! पहले बार रेवेन्यू में आई गिरावट, प्रीमियम सेगमेंट का बढ़ा दबदबा
Overview

भारत में चीनी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए बुरी खबर है। **फाइनेंशियल ईयर 25 (FY25)** में उनका रेवेन्यू **4.5%** घट गया है। यह पहली बार है जब चीनी ब्रांड्स को इस तरह के राजस्व (revenue) में गिरावट का सामना करना पड़ा है। इसकी मुख्य वजह भारतीय ग्राहकों का प्रीमियम स्मार्टफोन की ओर बढ़ता रुझान है।

मार्केट में आया बड़ा बदलाव

भारतीय स्मार्टफोन मार्केट एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। देश में काम कर रही नौ बड़ी चीनी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए यह पहला राजस्व (revenue) में गिरावट का साल रहा। फाइनेंशियल ईयर 2025 (FY25) में, इनके कुल रेवेन्यू में 4.5% की कमी आई है। पिछले साल जहां 42% की शानदार ग्रोथ देखी गई थी, वहीं अब स्थिति उलट गई है। इस बड़ी गिरावट की वजह भारतीय ग्राहकों का प्रीमियम स्मार्टफोन की ओर तेजी से बढ़ता रुझान है। ₹20,000 से कम कीमत वाले स्मार्टफोन्स का वैल्यू शेयर दो साल पहले 38% था, जो 2025 में घटकर सिर्फ 29% रह गया है। इससे Xiaomi, Oppo, OnePlus और Realme जैसी कंपनियों को सीधा नुकसान हुआ है। वहीं, Apple और Samsung ने प्रीमियम सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत की है।

प्रीमियम सेगमेंट में उछाल, Apple-Samsung की चांदी

जहां चीनी ब्रांड्स सस्ते फोन सेगमेंट में संघर्ष कर रहे हैं, वहीं ₹45,000 से ऊपर के प्रीमियम स्मार्टफोन मार्केट में जबरदस्त उछाल आया है। इस सेगमेंट का रिटेल वैल्यू शेयर 2023 में 36% था, जो 2025 में बढ़कर 47% हो गया है। इस सेगमेंट में Apple और Samsung का दबदबा है। Apple India ने FY25 में 18% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ दर्ज की और ₹79,378 करोड़ का रेवेन्यू कमाया, साथ ही ₹3,196 करोड़ का नेट प्रॉफिट भी दर्ज किया। Samsung India भी 11% से ज्यादा की बढ़त के साथ ₹1.11 लाख करोड़ का रेवेन्यू पार कर ₹1 लाख करोड़ के पार पहुंच गई। LG Electronics India ने 14.1% रेवेन्यू ग्रोथ के साथ ₹24,366.64 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया और नेट प्रॉफिट में 45.8% की भारी बढ़ोतरी के साथ ₹2,203.35 करोड़ कमाए। चीनी ब्रांड्स में, Vivo एक अपवाद के तौर पर उभरी है, जिसने Samsung जैसी ग्रोथ हासिल की है, जो प्रीमियम सेगमेंट में उनकी सफल रणनीति को दर्शाता है।

लागत का बढ़ना और रुपये का गिरना बना सिरदर्द

इन सबके अलावा, लागत (costs) का बढ़ना चीनी कंपनियों के लिए एक और बड़ी मुसीबत बन गया है। खास तौर पर मेमोरी चिप्स जैसी जरूरी कंपोनेंट्स की कीमतें दो से तीन गुना तक बढ़ गई हैं। इसके साथ ही, भारतीय रुपये का गिरना (depreciation) भी मुश्किलें बढ़ा रहा है। अक्टूबर 2025 में डॉलर के मुकाबले रुपया औसतन ₹88.369 पर था, और 2026 की शुरुआत में यह ₹90 के पार भी चला गया। इससे इंपोर्ट किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स के बिल ऑफ मैटेरियल्स (BoM) की लागत सीधे तौर पर बढ़ गई है। अकेले मेमोरी कंपोनेंट्स स्मार्टफोन की कुल BoM का 10-25% तक हो सकते हैं। यह बढ़ी हुई लागत कम से कम 2026 की तीसरी तिमाही (Q3) तक बनी रहने की उम्मीद है, जिससे इंडस्ट्री में कीमतों का बढ़ना तय है। Apple और Samsung जैसे प्रीमियम प्लेयर्स बढ़ी हुई लागत का कुछ बोझ उठा सकते हैं, लेकिन चीनी ब्रांड्स, जो कीमत-संवेदनशील सेगमेंट पर ज्यादा निर्भर हैं, उनके लिए यह लागत झेलना कहीं ज्यादा मुश्किल होगा।

रेगुलेटरी दबाव भी हावी

मार्केट के उतार-चढ़ाव और आर्थिक दबाव के अलावा, चीनी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां भारत में एक जटिल रेगुलेटरी माहौल (regulatory environment) से भी गुजर रही हैं। कई बड़ी कंपनियां, जैसे Oppo, Vivo और Lenovo-Motorola, अपने विदेशी पैरेंट कंपनियों से एक्सटर्नल कमर्शियल बोरिंग्स (ECBs) पर ज्यादा निर्भर हो गई हैं। इसकी वजह इक्विटी इन्फ्यूजन पर लगे प्रतिबंध और लोकल क्रेडिट हासिल करने में आने वाली दिक्कतें हैं। इन फंडिंग चुनौतियों के साथ-साथ रेगुलेटरी जांच और कुछ मामलों में फ्रीज की गई संपत्तियां (frozen assets) भी मुश्किलें बढ़ा रही हैं। उदाहरण के लिए, Xiaomi ने ₹48.20 अरब की राशि फ्रीज होने का खुलासा किया है। यह स्थिति भारत में सक्रिय ग्लोबल प्लेयर्स की स्थापित बाजार उपस्थिति और वित्तीय स्थिरता के बिल्कुल विपरीत है।

भविष्य की राहें और चुनौतियाँ

विशेषज्ञों का मानना है कि चीनी स्मार्टफोन ब्रांड्स के लिए रणनीतिक चुनौतियां (strategic challenges) कई हैं। हाई-वॉल्यूम, लो-मार्जिन सेगमेंट पर उनकी ऐतिहासिक निर्भरता अब एक बड़ी कमजोरी साबित हो रही है, क्योंकि ग्राहकों की पसंद और लागत का ढांचा बदल रहा है। Apple और Samsung जैसे प्रतिस्पर्धियों की तरह प्रीमियम प्राइसिंग हासिल करने में उनकी अक्षमता उन्हें इनपुट लागत वृद्धि और करेंसी डेप्रिसिएशन के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है। इसके अलावा, लगातार जारी रेगुलेटरी जांच और फंडिंग से जुड़ी जटिलताएं एक असमान प्रतिस्पर्धा का मैदान तैयार कर रही हैं, जिससे उन्हें ऐसे बाजार में निवेश और आक्रामक प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता सीमित हो रही है, जहां लगातार इनोवेशन और प्राइसिंग फ्लेक्सिबिलिटी की जरूरत होती है। भले ही ये ब्रांड्स अभी भी बड़ा वॉल्यूम शेयर बनाए हुए हैं, लेकिन उनका वैल्यू शेयर लगातार दबाव में है, जो लाभप्रदता (profitability) और बाजार प्रभाव में संभावित दीर्घकालिक गिरावट का संकेत देता है, जब तक कि वे उच्च-मार्जिन सेगमेंट में सफलतापूर्वक बदलाव नहीं करते या लागत और नियामक बाधाओं से बेहतर ढंग से नहीं निपटते।

आगे क्या?

एनालिस्टों का अनुमान है कि मास और मिड-सेगमेंट में यह मंदी जारी रहेगी, और आने वाले समय में सभी स्मार्टफोन टियर्स में कीमतें बढ़ने की उम्मीद है। प्रीमियम सेगमेंट में ग्रोथ का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है, जिससे एंट्री-लेवल और मिड-रेंज डिवाइसेज के साथ अंतर और बढ़ेगा। भारत के कुल स्मार्टफोन मार्केट में 2026 में वॉल्यूम में सिंगल-डिजिट गिरावट का अनुमान है, हालांकि औसत बिकने वाली कीमतों (ASPs) में 5%-7% की ईयर-ऑन-ईयर वृद्धि के कारण वैल्यू ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है। यह माहौल उन ग्लोबल प्लेयर्स के लिए फायदेमंद है जिनके पास मजबूत प्रीमियम पेशकशें और स्थापित इकोसिस्टम हैं, जबकि चीनी ब्रांड्स को बढ़ती लागत और नियामक चुनौतियों के बीच अपनी रणनीतियों को बदलने के दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.