ग्लोबल मार्केट में गिरावट, भारत में बूम!
साल 2025 के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर के 22 प्रमुख बाजारों में बेवरेज एल्कोहल की कुल बिक्री वॉल्यूम के हिसाब से 2% और वैल्यू के हिसाब से 4% गिरी। लेकिन भारत का डोमेस्टिक स्पिरिट्स सेक्टर (Spirits Sector) इस ट्रेंड के बिल्कुल उलट चला। भारतीय बाजार में कुल शराब की बिक्री वॉल्यूम में 4% और वैल्यू में 5% बढ़ी।
असली वजह: बढ़ता मिडिल क्लास!
इस ज़बरदस्त ग्रोथ का मुख्य कारण भारत का बढ़ता हुआ मिडिल क्लास है, जिसकी संख्या लगभग 150 मिलियन (15 करोड़) है और जिनकी आय लगातार बढ़ रही है। ये कंज्यूमर अब क्वालिटी और ब्रांड एक्सपीरियंस पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं और प्रीमियम व्हिस्की (Whisky) और वाइट स्पिरिट्स (White Spirits) की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि यही समझदार कंज्यूमर हैं जो वैल्यू ग्रोथ को बढ़ावा दे रहे हैं, जो कि कई विकसित देशों के मार्केट में देखने को नहीं मिल रहा।
इंपोर्ट ड्यूटी और लोकल प्लेयर्स का फायदा
भारत दुनिया का सबसे बड़ा स्पिरिट्स पीने वाला देश है, जहां 410 मिलियन (41 करोड़) केस से ज्यादा की खपत होती है। लेकिन, भारी इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) के कारण विदेशी ब्रांडों का दबदबा कम है। इसी वजह से लोकल मैन्युफैक्चरर्स (Manufacturers) और डिस्ट्रीब्यूटर्स (Distributors) को फायदा होता है। United Spirits (DISU.NS) जैसी कंपनियां, जिनकी भारत में मजबूत पकड़ है, इस डिमांड का सीधा लाभ उठा रही हैं।
ग्लोबल दिग्गजों की नई स्ट्रेटेजी
इस बदलते परिदृश्य को देखते हुए Diageo (Diageo) और Pernod Ricard (Pernod Ricard) जैसी बड़ी मल्टीनेशनल (Multinational) कंपनियां अपनी स्ट्रेटेजी (Strategy) पर फिर से विचार कर रही हैं। जहां पहले वे सिर्फ प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रही थीं, अब वे वॉल्यूम, मार्केट की प्रासंगिकता और अलग-अलग प्राइस रेंज वाले प्रोडक्ट्स पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। ग्लोबल इकोनॉमी (Economy) में अनिश्चितता और पारंपरिक प्रीमियम मार्केट (Market) में धीमी होती डिमांड, इस बदलाव की वजह है।
भविष्य का आउटलुक (Future Outlook)
भारत के प्रीमियम स्पिरिट्स मार्केट का भविष्य उम्मीदों से भरा है। मजबूत डेमोग्राफिक्स (Demographics) और इकोनॉमिक ग्रोथ (Growth) इसकी वजह हैं। हालांकि, इंपोर्ट ड्यूटी, कंज्यूमर कॉन्फिडेंस (Consumer Confidence) और लोकल इकोनॉमिक फैक्टर्स (Factors) इसकी रफ्तार पर असर डाल सकते हैं। एनालिस्ट्स (Analysts) का मानना है कि भारतीय स्पिरिट्स कैटेगरी में ग्रोथ जारी रहेगी, लेकिन कंपनियों को अपना पोर्टफोलियो (Portfolio) डाइवर्सिफाई (Diversify) करने की जरूरत होगी।
