India Pet Care Market: 2032 तक ₹2.1 लाख करोड़ का होगा कारोबार!

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Pet Care Market: 2032 तक ₹2.1 लाख करोड़ का होगा कारोबार!

भारत का पेट केयर (Pet Care) मार्केट 2024 में ₹30,434 करोड़ से बढ़कर 2032 तक ₹2.1 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। 'पेट पेरेंटिंग' (Pet Parenting) ट्रेंड ने प्रीमियम पोषण, खास हेल्थकेयर और लग्जरी ग्रूमिंग सेवाओं पर खर्च बढ़ाया है। जैसे-जैसे शहरी घरों में पालतू जानवरों की संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे हाई-एंड, प्रजाति-विशिष्ट उत्पादों और प्रोफेशनल पशु चिकित्सा देखभाल (Veterinary Care) की मांग भी बढ़ रही है।

पेट पेरेंटिंग का बढ़ता क्रेज

भारतीय पेट केयर इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब लोग अपने पालतू जानवरों को परिवार का अहम हिस्सा मानने लगे हैं। इस 'पेट पेरेंटिंग' (Pet Parenting) ट्रेंड के चलते, जो कभी एक छोटा सा सेक्टर था, वह अब अरबों डॉलर का इंडस्ट्री बन गया है। लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में इस मार्केट का वैल्यू लगभग ₹30,434 करोड़ ($3.6 बिलियन) था, और 2032 तक इसके ₹2.1 लाख करोड़ ($24.8 बिलियन) तक पहुंचने का अनुमान है।

प्रीमियम खर्च के पीछे क्या है?

यह ग्रोथ सिर्फ पेट फूड तक ही सीमित नहीं है। आजकल के ग्राहक पारंपरिक पैक्ड फूड की जगह ग्रेन-फ्री (Grain-free), फ्रेश-कुक्ड (Fresh-cooked) और खास न्यूट्रिशन वाले डाइट को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही ट्रेंड ग्रूमिंग और हेल्थकेयर जैसी सेवाओं में भी दिख रहा है, जो अब बड़े खर्चे बन गए हैं। प्रोफेशनल ग्रूमिंग सेशन ₹500 से शुरू हो सकते हैं, जबकि एक सामान्य पशु चिकित्सा (Veterinary) कंसल्टेशन पर लगभग ₹1,200 प्रति विजिट का खर्च आता है, इसमें एडवांस डायग्नोस्टिक्स या स्पेशलिस्ट ट्रीटमेंट का खर्च अलग है। पशु चिकित्सा के बढ़ते खर्चों को देखते हुए पेट इंश्योरेंस (Pet Insurance) का नया मार्केट भी बन रहा है, जिसके एंट्री-लेवल प्लान लगभग ₹169 से शुरू हो रहे हैं।

मार्केट में विविधता और कंज्यूमर ट्रेंड्स

हालांकि भारत के शहरी इलाकों में कुत्ते और बिल्लियाँ सबसे आम पालतू जानवर हैं, लेकिन लोग अब दूसरे जानवर भी पाल रहे हैं। खरगोश, पक्षी, सजावटी मछलियाँ और सरीसृप (Reptiles) की बढ़ती लोकप्रियता रिटेलर्स को खास प्रोडक्ट्स रखने और स्पेशलिस्ट पशु चिकित्सा विशेषज्ञता की मांग पैदा कर रही है। इंडी या सड़क पर पाए जाने वाले कुत्तों को अपनाने का चलन भी बढ़ रहा है, जो कुछ पशु चिकित्सा सुविधाओं में 20% तक के मरीज़ बन गए हैं। हालांकि, लग्जरी सेगमेंट में खर्च शिफ़ त्ज़ू (Shih Tzus) और रिट्रीवर्स (Retrievers) जैसी लोकप्रिय नस्लों पर ही केंद्रित है।

ऑर्गनाइज्ड और अन-ऑर्गनाइज्ड सेक्टर का अंतर

निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि प्रीमियम पेट इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन भारत की बड़ी स्ट्रीट एनिमल पॉपुलेशन के साथ तालमेल बिठाना एक बड़ी चुनौती है। खर्च का अधिकांश हिस्सा शहरी केंद्रों पर केंद्रित है, और इन बिजनेस मॉडलों की स्केलेबिलिटी इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां ऑर्गनाइज्ड रिटेल और पारंपरिक, अन-ऑर्गनाइज्ड लोकल विक्रेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा को कैसे संभालती हैं। इसके अलावा, हाई-टिकट बिक्री के लिए शुद्ध नस्ल के जानवरों पर निर्भरता का मतलब है कि इस सेगमेंट पर ध्यान केंद्रित करने वाली कंपनियां शहरी पालतू जानवरों की प्राथमिकताओं में बदलाव के प्रति संवेदनशील होंगी। जैसे-जैसे इंडस्ट्री परिपक्व हो रही है, निवेशकों के लिए मुख्य बिंदु पेट इंश्योरेंस को अपनाने की दर, प्रोफेशनल पशु चिकित्सा सेवाओं की आवृत्ति और ऑर्गनाइज्ड चेन की फ्रैग्मेंटेड, अन-ऑर्गनाइज्ड पेट केयर सेगमेंट से बाजार हिस्सेदारी पर कब्जा करने की क्षमता होगी।

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