Bain & Company के प्रोजेक्शन के मुताबिक, भारत का लग्जरी मार्केट एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। यह 2030 तक $90 अरब डॉलर के विशाल आंकड़े तक पहुंच सकता है। यह ग्रोथ बताती है कि मार्केट अब दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे अपने पुराने गढ़ों से आगे बढ़ रहा है। देश भर में धन का फैलाव हो रहा है, बजाय इसके कि यह केवल इन पुराने शहरी केंद्रों में ही बना रहे।
पुराने स्टीरियोटाइप्स - जैसे दिल्ली सिर्फ दिखावे के लिए, मुंबई सूक्ष्म पसंद के लिए, और बेंगलुरु टेक पैसे वालों के लिए - अब फीके पड़ रहे हैं। Sathyajit Radhakrishnan, Aditya Birla Fashion and Retail Limited में इंटरनेशनल ब्रांड्स के सीईओ, कहते हैं कि आजकल के खरीदार, खासकर जो ग्लोबल और ऑनलाइन दुनिया से जुड़े हैं, पूरे देश में एक जैसी ही खरीदारी कर रहे हैं। अब अंतर सिर्फ उनके स्टाइल में नहीं, बल्कि इस बात में है कि लोग ब्रांड्स को कैसे खोजते हैं और उनसे कैसे जुड़ते हैं। इसी वजह से लग्जरी कंपनियां अब ग्राहकों को उनके रहने की जगह के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी लाइफस्टाइल और नौकरियों के आधार पर ग्रुप करना शुरू कर रही हैं।
एक्सपर्ट्स तीन मुख्य तरह के कस्टमर की पहचान करते हैं। पहले हैं 'एस्पिरेशनल बायर्स' (aspirational buyers), जो तुरंत लग्जरी आइटम खरीदना चाहते हैं। दूसरे, 'नए अमीर' (newly wealthy) लोग जो लग्जरी कलेक्शन बना रहे हैं। और तीसरे, 'स्थापित अमीर परिवार' (established wealthy families), जो आमतौर पर स्थानीय तौर पर खरीदने में धीमे होते हैं। लग्जरी रिटेल एडवाइजरी फर्म Pike Preston के मैनेजिंग डायरेक्टर, Rahul Prasad बताते हैं कि एस्पिरेशनल बायर्स अक्सर पेमेंट प्लान का इस्तेमाल करते हैं और स्पष्ट लोगो वाले आइटम पसंद करते हैं। नए अमीर खरीदार अपने साथियों को देखकर महंगे सामान खरीदते हैं। वहीं, स्थापित परिवार अक्सर 'क्वाइट लग्जरी' (quiet luxury) पसंद करते हैं और इंटरनेशनल शॉपिंग का आनंद लेते हैं।
हालांकि पूरा मार्केट बढ़ रहा है, लेकिन सबसे सोफिस्टिकेटेड खरीदार अभी भी बड़े शहरों में ही हैं। वॉच रिटेलर Ethos Limited के COO, Mukul Khanna का कहना है कि शहरी खरीदार ग्लोबल प्रोडक्ट लॉन्च और टेक्निकल स्पेसिफिकेशन्स के बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं। चंडीगढ़ या जयपुर जैसे छोटे शहरों में लोग लग्जरी सामान के मालिक बनना चाहते हैं, लेकिन अक्सर उन्हें यह पर्सनल कनेक्शन और कहानियों के माध्यम से पता चलता है। इन ग्राहकों तक पहुंचने के लिए, Ethos जैसे ब्रांड्स उन्हें वॉचमेकिंग क्लास जैसे हैंड्स-ऑन अनुभव प्रदान करते हैं ताकि वे क्राफ्ट्समैनशिप सीख सकें। Tata CLiQ Luxury भी इन नॉन-मेट्रो इलाकों से अच्छी बिक्री देख रहा है, जो साबित करता है कि वहां कई तरह के प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ रही है।
लग्जरी ब्रांड्स अब ग्राहकों से जुड़ने के तरीके बदल रहे हैं। वे पारंपरिक स्टोर्स के बजाय प्राइवेट बैंक्स, वेल्थ नेटवर्क्स और स्पेशल इवेंट्स के ज़रिए पहुंच बना रहे हैं। ये पर्सनलाइज्ड तरीके बताते हैं कि लग्जरी सिर्फ शादियों जैसे बड़े मौकों के लिए नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनती जा रही है। युवा अमीर खरीदार और जो अपनी दौलत बना रहे हैं, वे लग्जरी को सिर्फ स्टेटस सिंबल के बजाय अपनी पर्सनल पसंद और लाइफस्टाइल को एक्सप्रेस करने का तरीका मानते हैं। इसलिए, कस्टमर लॉयल्टी के लिए प्राइम स्टोर लोकेशन जितनी ही महत्वपूर्ण अब रिलेशनशिप बनाना और पर्सनल सर्विस देना हो गया है।
