मुनाफे पर बढ़ता फोकस
भारत का अल्कोहलिक बेवरेज मार्केट बदल रहा है। कंपनियां अब कम प्रॉफिट मार्जिन पर भारी वॉल्यूम बेचने की बजाय, बढ़ती मिडिल क्लास की खर्च करने की क्षमता का फायदा उठाने वाली स्ट्रैटेजी अपना रही हैं। इस बदलाव से दो मुख्य रास्ते बन रहे हैं: या तो अपने मौजूदा ग्लोबल ब्रांड्स को और बेहतर बनाना या फिर डोमेस्टिक प्रीमियम ऑफर्स को तेजी से एक्सपैंड करना।
प्रीमियम बनने के दो रास्ते
अपनी पेरेंट कंपनी Diageo से प्रभावित होकर United Spirits, सेल्स के वॉल्यूम से ज़्यादा प्रॉफिट को प्राथमिकता दे रही है। अपने 'Prestige and Above' ब्रांड्स पर ध्यान केंद्रित करके, यह अपने मौजूदा ग्राहकों से काफी वैल्यू जेनरेट कर रही है। इस अप्रोच का नतीजा यह है कि प्रॉफिट ग्रोथ सेल्स ग्रोथ से ज़्यादा तेज़ी से बढ़ रही है। इसके विपरीत, Radico Khaitan भारतीय कंज्यूमर मार्केट में तेज़ी से ग्रोथ हासिल करने की कोशिश कर रही है। यह प्रीमियम कैटेगरी में मार्केट शेयर पकड़ने के लिए ब्रांडिंग और डिस्ट्रीब्यूशन में भारी इन्वेस्टमेंट कर रही है, जो इसके प्रीमियम बिजनेस को बनाने के साथ-साथ स्ट्रॉन्ग ऑपरेटिंग लीवरेज के संकेत दे रहा है। हालांकि, United Spirits ब्रांड मैच्योरिटी प्रोसेस में ज़्यादा आगे है।
प्रीमियम बढ़ाने में जोखिम
प्रीमियमाइजेशन पर पॉजिटिव मार्केट व्यू के बावजूद, इसमें कुछ जोखिम भी हैं। स्टेट एक्साइज ड्यूटीज़ का अनुमान लगाना मुश्किल है और ये प्रॉफिट को तेज़ी से खत्म कर सकती हैं। United Spirits को टॉप लाइन ग्रोथ धीमी रहने का खतरा है; अगर महंगाई की वजह से प्रीमियम स्पिरिट्स की डिमांड कमज़ोर पड़ती है, तो इसके प्रॉफिट ग्रोथ पर असर पड़ सकता है। Radico Khaitan को एग्जीक्यूशन रिस्क का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि इसके एग्रेसिव स्केलिंग के लिए मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन पर लगातार खर्च की ज़रूरत है। अगर इसमें उम्मीद से ज़्यादा समय लगा, तो यह फ्री कैश फ्लो को प्रभावित कर सकता है। एनालिस्ट्स का यह भी कहना है कि दोनों कंपनियां हाई वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रही हैं, जिससे नतीजों के उम्मीदों से कम रहने पर गलती की गुंजाइश बहुत कम रह जाती है।
मार्केट के लिए आगे क्या?
इन कंपनियों का भविष्य अर्बन कंज्यूमर्स की स्ट्रेंथ पर निर्भर करेगा। एनालिस्ट्स उम्मीद कर रहे हैं कि ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और ग्लास व ग्रेन जैसे कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण United Spirits और Radico Khaitan के बीच का गैप और बढ़ेगा। इन्वेस्टर्स को सेल्स वॉल्यूम ग्रोथ और प्राइस पर केस के बीच के अंतर पर नज़र रखनी चाहिए। जो कंपनियां लागत वृद्धि के दौरान अपनी प्राइसिंग पावर बनाए रख सकती हैं, उनके बेहतर परफॉर्म करने की संभावना है, जबकि जो कंपनियां अपनी मार्केट पोजिशन बनाए रखने के लिए मार्केटिंग पर ज़्यादा निर्भर हैं, उन्हें प्रॉफिट में अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।
