भारत का ज्वैलरी मार्केट बदला! डायमंड हुए सस्ते, 9K गोल्ड की बढ़ी डिमांड, जानें क्यों

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AuthorMehul Desai|Published at:
भारत का ज्वैलरी मार्केट बदला! डायमंड हुए सस्ते, 9K गोल्ड की बढ़ी डिमांड, जानें क्यों
Overview

भारत का ज्वैलरी सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। डायमंड (हीरे) की डिमांड में भारी उछाल आया है, क्योंकि इनके दाम करीब **30%** तक गिर गए हैं। वहीं, सोने के रिकॉर्ड तोड़ भाव के चलते लोग अब 9-कैरेट और 14-कैरेट सोने के गहनों के साथ-साथ स्टडेड (जड़ेऊ) डिजाइन्स की ओर रुख कर रहे हैं। युवा पीढ़ी इस बदलाव की मुख्य वजह है।

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डायमंड की डिमांड में उछाल, दाम गिरे!

प्राकृतिक डायमंड (हीरे) की कीमतों में करीब 30% की गिरावट आई है, जो 2022 के हाई लेवल से काफी कम है। इस प्राइस करेक्शन के चलते सोलिटेयर (एकल हीरे) की मांग में भारी इजाफा हुआ है। इंडस्ट्री के कुछ जानकारों का कहना है कि मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में डायमंड की बिक्री में 25% से 35% तक की सालाना ग्रोथ देखी जा रही है। उदाहरण के लिए, जो 1-कैरेट की एंगेजमेंट रिंग पहले ₹7-8 लाख में मिलती थी, अब वो ₹5-5.5 लाख में मिल रही है। इस एफोर्डेबिलिटी (किफायती दाम) ने 28 से 40 साल के युवा खरीदारों को आकर्षित किया है, जो खुद के लिए या खास मौकों पर खरीदारी कर रहे हैं।

सोने के रिकॉर्ड भाव ने बदला खरीदारों का मिजाज

वहीं, सोने की कीमतें भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। 2026 की शुरुआत में 24-कैरेट सोने का भाव ₹1,59,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास था, जो पिछले साल की तुलना में करीब 84% ज्यादा है। सोने की बढ़ी कीमतों का सीधा असर डायमंड और स्टडेड (जड़ेऊ) गहनों की बिक्री पर दिख रहा है, क्योंकि ग्राहक अब कम कीमती धातु वाले या अधिक किफायती विकल्प चुन रहे हैं।

युवा पीढ़ी की पसंद: 9-कैरेट गोल्ड और Lab-Grown डायमंड

मिलेनियल्स और Gen Z, यानी युवा पीढ़ी, अब गहनों में 'सेल्फ-एक्सप्रेशन' (खुद को व्यक्त करना), व्यावहारिकता और नैतिक विचारों को ज्यादा महत्व दे रही है। वे हल्के, वर्सटाइल (बहुमुखी) और कस्टमाइज्ड (अनुकूलित) डिजाइन्स पसंद कर रहे हैं। इसी मांग को देखते हुए, ज्वैलर्स 9-कैरेट और 14-कैरेट सोने के गहनों की रेंज बढ़ा रहे हैं। जुलाई 2025 में सरकार द्वारा 9-कैरेट सोने के लिए BIS हॉलमार्किंग को मंजूरी मिलने के बाद से इन गहनों पर ग्राहकों का भरोसा बढ़ा है। कुछ रिटेलर्स ने हॉलमार्किंग लागू होने के बाद 9-कैरेट सेगमेंट में अपनी मासिक बिक्री में लगभग 200% तक की बढ़ोतरी देखी है। इसके अलावा, Lab-Grown Diamonds (LGDs) भी अपनी एफोर्डेबिलिटी और नैतिक अपील के कारण बाजार में बड़ी हिस्सेदारी बना रहे हैं, कुछ रिपोर्टों के अनुसार पिछले साल बेची गई 50% एंगेजमेंट रिंग्स LGDs थीं। 2025 में भारतीय डायमंड मार्केट का कुल वैल्यू करीब $3.49 बिलियन था।

अंतर्राष्ट्रीय दबाव और निर्यात पर असर

भारतीय डायमंड इंडस्ट्री को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% तक के भारी टैरिफ (शुल्क) के कारण डायमंड एक्सपोर्ट बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच अमेरिका को भेजे जाने वाले डायमंड एक्सपोर्ट की वैल्यू में 50% की भारी गिरावट आई है। चीन से डिमांड में पहले गिरावट थी, लेकिन अब इसमें सुधार के संकेत दिख रहे हैं। वहीं, Lab-Grown Diamonds की बढ़ती लोकप्रियता और कॉम्पिटिटिव कीमतों ने प्राकृतिक पत्थरों की कीमतों में गिरावट में योगदान दिया है। हालांकि, शादियों और त्योहारों जैसे मौकों पर घरेलू मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है।

भविष्य का रास्ता: ग्रोथ और चुनौतियाँ

India Ratings & Research ने रिटेल ज्वैलरी सेक्टर के लिए FY27 के लिए न्यूट्रल (तटस्थ) आउटलुक बनाए रखा है। FY26 में, सोने की ऊंची कीमतों के चलते रेवेन्यू में 23% तक की सालाना ग्रोथ का अनुमान है। ऑर्गेनाइज्ड (संगठित) ज्वैलर्स, जो भरोसा, पारदर्शिता और नियमों का पालन करने पर जोर देते हैं, अनऑर्गनाइज्ड (असंगठित) खिलाड़ियों से मार्केट शेयर हासिल कर रहे हैं। इंडस्ट्री का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह ग्राहकों की बदलती पसंद, कीमतों में उतार-चढ़ाव और सरकारी पहलों को कितनी चतुराई से अपनाती है। किफायती लग्जरी सेगमेंट, जैसे 9-कैरेट गोल्ड, स्टडेड ज्वैलरी और वैल्यू-ड्रिवन डायमंड ऑफरिंग्स में स्ट्रैटेजिक डाइवर्सिफिकेशन (रणनीतिक विविधीकरण) ग्रोथ के लिए अहम होगा।

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